शब्द रूप – Shabd Roop in Sanskrit List, Table, Trick – संस्कृत व्याकरण

Shabd Roop

परिभाषा – संज्ञा और संज्ञा सूचक शब्द सुबंत के अंतर्गत आते है इन्ही शब्दों को जब संस्कृत में विभिन्न रूपों में प्रयुक्त किया जाता तो इन्हें संस्कृत शब्द रूप (Shabd Roop) या विभक्ति कहते हैं।

संस्कृत में सबसे बड़ी परेशानी शब्द रूपों को लेकर होती है। संस्कृत में करीब 2400 शब्द हैं जिनके रूप हमें याद करने होते हैं। अब जाहिर सी बात है कि इतने सारे शब्द रूप याद हो जाएं यह संभव नहीं है। या फिर वे विरले ही लोग हैं जिन्हें इतने Sanskrit में शब्द रूप याद हो सकें।

संस्कृत शब्द रूप याद करने की ट्रिक (Trick)

यहां Shabd Roop याद करने की जो trick दी गई है उसमें इस table का बड़ा योगदान है। आप इस टेबल को अगर एक बार ध्यान पूर्व पढ लिया तो आपको संस्कृत में शब्द रूप बनाने में कभी कोई परेशानी नहीं होगी। क्योंकि यही टेबल मेरी सारी मेहनत का सार है। विभक्तियों के रूपों का पदक्रम :-

विभक्ति एकवचन द्विवचन वहुवचन्
प्रथमा अ: आ: (जस् )
द्वतीया अम् औट् आ: (शस् )
त्रतीया आ (टा) भ्याम् भि: (भिस् )
चतुर्थी ए (ङे ) भ्याम् भ्य: (भ्यस् )
पञ्चमी अ: (ड़स् ) भ्याम् भ्य: (भ्यस् )
षष्ठी अ: ओ: (ओस् ) आम्
सप्तमी इ (डि.) ओ: (ओस् ) सु (सुप् )

किसी भी शब्द के शब्द रूपों में हम एक बात देखते हैं कि-

  1. प्रथमा और द्वतीया विभक्ति में वहुवचन के रूप समान होते हैं।
  2. त्रतीया, चतुर्थी, और पञ्चमी विभक्ति में द्विवचन के रूप लगभग सभी शब्दों के रूप समान होते हैं।
  3. चतुर्थी, और पञ्चमी विभक्ति में वहुवचन के शब्द रूप भी एक जैसे होते हैं।
  4. षष्ठी और सप्तमी विभक्ति में द्विवचन के रूप लगभग सभी शब्दों के रूप एक ही से होते हैं।

इन रूपों रूप को याद करने के बाद बचे हुए शब्द रूप याद कर लेने पर, आपको उस प्रकार शब्दों के संस्कृत में सभी शब्द रूप स्वतः ही याद हो जाएंगे, और आपको रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

जैसे यदि आपने राम के शब्द रूप याद कर लिए तो देव, बालक, वृक्ष, सूर्य, सुर, असुर, मानव, अश्व, गज, ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, छात्र, शिष्य, दिवस, लोक, ईश्वर, भक्त आदि के शब्द रूप आप स्वतः ही बना लोगे।

Shabd Roop in Sanskrit (शब्द रूप संस्कृत)

Shabd Roop in Sanskrit
Shabd Roop in Sanskrit

संस्कृत शब्द रूप (Shabd Roop List)

यहाँ पर आपको संस्कृत के अति महत्वपूर्ण शब्द रूप देखने को मिलेगें, जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। और अधिक शब्द रूप देखने के लिए website के search box का प्रयोग कर सकते हैं। my cocahing पर आपको लगभग सभी शब्द रूप मिल जाएंगे। धातु रूप देखने के लिए – Dhatu Roop in sanskrit पर जाएँ। अति महत्वपूर्ण शब्द रूप की सूची निम्नलिखित हैं:-

संज्ञा शब्द रूप

  1. देव (देवता),
  2. बालक ,
  3.  विश्वपा (विश्व के रक्षक),
  4.  पति (स्वामी),
  5.  सखि (सखा/मित्र),
  6.  सुधी (पंडित),
  7.  साधु,
  8.  स्वयम्भू (ब्रह्म),
  9.  दातृ (दाता /दानी),
  10.  पितृ (पिता),
  11.  रै (धन /सोना),
  12.  गो (गौ / बैल / इन्द्रियाँ / किरण / सूर्य),
  13.  ग्लौ (चन्द्रमा/कपूर),
  14.  लता ,
  15.  ज़रा (बुढ़ापा),
  16.  मति (बुध्दि),
  17. नदी
  18.  श्री (लक्ष्मी, शोभा)
  19. स्त्री (woman)
  20. धेनु (गाय)
  21. वधू (स्त्री ,पतोहू ,wife )
  22. भू (पृथ्वी)
  23. मातृ (माता, mother )
  24. स्वसृ (sister )
  25. फल (fruit )
  26. वारि (जल, water)
  27. दधि (दही , curd )
  28. मधु (शहद, honey )
  29. अनादि (जिसकी आदि ना हो, without beginning )
  30. स्वादु (स्वादिष्ट , tasteful )
  31. धातृ ( धाता , creator )

हलंत/व्यंजनांत पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग शब्द रूप

हलंत(व्यंजन अंत वाले शब्द – व्यंजनांत): इन शब्द रूपों में ज्यादा अंतर नहीं होता है। ये शब्द रूप इस प्रकार हैं-

  1. चकारांत –जलमुच् (मेघ , cloud)
  2. प्राच् (पूर्व दिशा)
  3. प्रत्यच् (पश्चिम दिशा)
  4. जकारान्त शब्द –बणिज् (व्यापारी, tradesman)
  5. सम्राज् (सम्राट, Emperor)
  6. तकरान्त् –भूमृत् (पहाड / राजा, mountain or king)
  7. ‘अत् (शतृ )’ प्रत्यांत शब्दधावत् (दौडता हुआ, running)
  8. ‘मत्’ प्रत्यायान्त शब्द श्रीमत् (धनवान्, wealthy)
  9. महत् (बडा, महान्, great)
  10. दकारान्त शब्द – सुह्रद् (दोस्त, friend)
  11. धकारान्त शब्द –वीरूध् (लता, creeper)
  12. अन्’ भागान्त –लघिमन् (छोटापन, lowliness or lightness)
  13. आत्मन्  (आत्मा, soul)
  14. स्वन् (कुत्ता, dog)
  15. युवन् (जवान, young)
  16. मघवन् (इन्द्र)
  17. इन्  भागान्त् –गुणिन् (गुणी , meritorious)
  18. पथिन् (रास्ता , passage)
  19. हन् भागान्त पुल्लिङ्ग् –वृत्रहन् (Indra)
  20. पकारान्त‘अप्’ शब्द (जल)
  21. भकारान्त शब्द – ककुभ् (दिशा / अर्जुन वृक्ष)
  22. शकारांत शब्द –विश् (वैश्य, vasishya)
  23. स्त्रीलिङ्ग शब्द –दिश्  (दिशा , direction)
  24. षकारान्त शब्द – रत्नमुष् (पुल्लिङ्ग्), द्विष् (शत्रु, पुल्लिङ्ग्), आशिष् (स्त्रीलिङ्ग)
  25. सकारान्तवेधस् (ब्रह्मा)
  26. उशनस् (शुक्राचार्य , Shukra)
  27. दोस् (हाथ, Hand)
  28. विद्वस् (विद्वान, A Learned man)
  29. जग्मिवस् (चला गया / बीत गया , Gone or Past )
  30. इयस् भागान्त – लघीयस् (हल्का / छोटा , light or small )
  31. पुमस् (आदमी, Man)
  32. रकारान्त शब्द –गिर् (वाणी, words)
  33. वकारान्त शब्द – दिव् (आकाश, स्वर्ग, sky, heavan)
  34. सकारान्त शब्द –आशिस् (आशीर्वाद, blessing)
  35. हकारान्त शब्द –मधुलिह् (मधुमक्खी),
  36. उपानह् (जूता, shoes)

हलंत/व्यंजनांत नपुन्सकलिङ्ग् शब्द रूप

नपुंसकलिंग शब्द रूप पुल्लिंग शब्द रूपों की तरह ही होते हैं। सिर्फ प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के शब्द रूपों में अंतर होता है। ये शब्द रूप इस प्रकार हैं-

  1. चकारान्त शब्द –प्राच् – नपुंसकलिंग (पूर्व, east)
  2. उदच् (उत्तर, north)
  3. तिर्य्यच्  (पक्षी, bird)
  4. प्रत्यच् (पश्चिम, west)
  5. तकारान्त शब्द –भविष्यत् (future)
  6. अत् प्रत्यान्त् शब्द –गच्छत् (जाता हुआ , going)
  7. इच्छत् (चाहता हुआ, wishing)
  8. ददत् (देता हुआ, giving)
  9. महत् (बड़ा , great)
  10. दकारांत शब्द –ह्रद् (ह्रदय, heart)
  11. अन् भागान्त शब्द –धामन्  (घर, house)
  12. कर्म्मन्  (काम , work)
  13. अहन्  (दिन, day)
  14. इन्  भागान्त  शब्द –स्थायिन् (टिकाऊ /स्थायी , permanent / durable)
  15. अस् भागान्त शब्द –पयस्  (पानी/दूध , water /milk)
  16. उस् भागान्त शब्द –धनुस् (धनुष , bow)

सर्वनाम शब्द रूप

सर्वनाम की परिभाषा – जिन शब्दों का प्रयोग नाम (संज्ञा) के साथ विशेषण के रूप में किया जाता है या जो नाम (संज्ञा) के स्थान पर अकेले भी आते हैं उन्हें ‘सर्वनाम’ कहते हैं।  संस्कृत में सर्वनामों की संख्या लगभग चौंतीस है।

सर्व (सब), उभय (दो), अन्य, तद् (वह), यद् (जो), एतद् (यह), इदम् (यह), अदस् (वह), युष्मद् (तुम), अस्मद् (मैं), भवत् (आप), किम् (क्या) आदि प्रमुख सर्वनाम शब्द हैं।

सर्वनाम शब्द के उदाहरण

  • ‘वह’ बालक जाता है। = ‘सः’ बालकः गच्छति।
  • ‘ये’ लड़के खेलते हैं। = ‘एते’ बालकाः क्रीडन्ति।
  • ‘तुम’ ‘कौन’ हो ? = ‘त्वं’ ‘कः’ असि ?
  • ‘मैं’ ‘वह’ ही लड़का हूँ। = ‘अहं’ ‘सः’ एव बालकः अस्मि।
  • ‘जो’ ‘उस’ विद्यालय में था। = ‘यः’ ‘तस्मिन्’ विद्यालये आसीत्।

ऊपर के वाक्यों में वह, ये, तुम, मैं, जो आदि शब्द सर्वनाम हैं।

सर्वनाम विशेषण शब्द

सम्बन्ध वाचक सर्वनाम जैसे – मम (मेरा), अस्माकम् (हमारा), तव (तेरा), युष्माकम् (तुम्हारा), अस्य (इसका), तस्य (उसका) आदि शब्दों में कुछ प्रत्यय जोड़कर इनसे विशेषण बनाकर इन्हें अन्य विशेष्यों के अनुसार प्रयोग किया जाता है। इन प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

कुछ सर्वनाम शब्दों में “छ (ईय)” प्रत्यय होने पर क्रमश: तद् से तदीय, एतद् से एतदीय, यद् से यदीय, इदम् से इदमीय आदि शब्द रूप बनते हैं।

सर्वनाम शब्द रूप के भेद

सर्वनाम शब्द, रूप के अनुसार पांच विभागों में विभक्त है:- 1. सर्व्वादि, 2. अन्यादि, 3. पूर्वादि, 4. इदमादि, 5. यदादि। सर्वनाम शब्द रूपों का सम्बोधन नहीं होता है।

नोट:- सर्व, विश्व, उभय, एक, और एकतर इन शब्दों के रूप एकसमान ही होते है।

‘सर्व्वादि’ सर्वनाम शब्द रूप

  1. सर्व – पुल्लिंग  ( सभी , all ) —
  2. सर्व – क्लीवलिंग, नपुंसकलिंग
  3. सर्व – स्त्रीलिंग

‘अन्यादि’ सर्वनाम शब्द रूप

  1. अन्य, अन्यतर, इतर, क़तर, कतम, और एकतम आदि शब्दों के रूप सर्व्वादि के तुल्य हैं। केवल नपुंसकलिंग के प्रथमा तथा द्वतीया विभक्ति के एकवचन में – अन्यत् , अन्यतरत् , इतरत् , कतमत्  और एकतमत् ऐसा रूप होता है।

‘पूर्व्वादि’ सर्वनाम शब्द रूप

पूर्व, पर, अपर, अवर, अघर, दक्षिण, उत्तर, स्व इनके रूप एक समान होते हैं।

  1. पूर्व्व – पुल्लिंग
  2. पूर्व्व – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग)

‘इदमादि’ सर्वनाम शब्द रूप

इदम् , अस्मद् , युष्मद् , अदस् , शब्दो के रूप मे भेद होने के कारण अलग अलग लिखे जाते है।

  1. इदम् – पुल्लिङ्ग् ( यह , this)
  2. इदम् – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग)
  3. इदम् – स्त्रीलिङ्ग
  4. अस्मद् – सभी लिङ्गो में ( मै / हम लोग , I / We)
  5. युष्मद्  – सभी लिङ्गो में ( तू / तुम , You)
  6. अदस् – पुल्लिङ्ग् (वह , That)
  7. अदस् – क्लीवलिंग (वह , That)
  8. अदस् – स्त्रीलिङ्ग (वह , That)

‘यदादि’ सर्वनाम शब्द रूप

यद् , तद् , एतद् , त्यद् , किम् – इन शब्दों का क्रमशः य: , स: , एष: , स्य: , क: होता है। और सर्व्वादि के तुल्य रूप होते हैं। नपुंसकलिंग में प्रथमा और द्वतीया के एकवचन में यत् , तत् , एतत् , त्यत् , किम् होता है। स्त्रीलिंग में इन शब्दों का रूप या , सा , एषा , स्या, का, होता है।

  1. यद् – पुल्लिंग (जो, Who)
  2. यद् – स्त्रीलिङ्ग (जो, Who)
  3. यद् – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग ) (जो, Who)
  4. तद् – पुल्लिङ्ग् (वह , That)
  5. तद् – स्त्रीलिङ्ग (वह , That)
  6. तद् – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग )  (वह , That)
  7. एतद् – पुल्लिङ्ग् (यह , This)
  8. एतद् – स्त्रीलिङ्ग (यह , This)
  9. एतद् – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग ) (यह , This)
  10. किम् – पुल्लिङ्ग् (क्या , कौन , What , Who)
  11. किम् – स्त्रीलिङ्ग (क्या , कौन , What , Who)
  12. किम् – क्लीवलिंग (नपुंसकलिंग ) (क्या , कौन , What , Who)
  13. भवत् – पुल्लिङ्ग् (आप, Your)
  14. भवत् – स्त्रीलिङ्ग (आप, Your)

संख्यावाची शब्द रूप

एक शब्द एक वचनान्त है, पर कुछ के अर्थ में वह कभी कभी बहुवचन भी होता है। एक शब्द का रूप सर्व के समान होता है।

  1. एक (One) – एकवचनान्त एक
  2. द्वि (Two) – नित्य द्विवचनान्त
  3. त्रि (Three) – नित्य वहुवचनान्त शब्द
  4. चतुर (Four) – नित्य वहुवचनान्त शब्द
  5. पञ्चन् (Five) , षष् (Six) , अष्टन् (Eight)

ध्यान रखें:-

  • सात (7) और नौ (9) से अठारह (18) तक के सभी शब्दों के रूप वहुवचन और तीनों लिंगो में सामान होते हैं। इनके शब्द रूप पांच (5) की तरह ही होते हैं।
  • उन्नीस (19) से निन्यानवे (99) तक के सभी शब्द रूप एकवचन और स्त्रीलिंग होते हैं।
  • इक्कीश (21) से अठ्ठाइस (28) तक के सभी शब्द रूप मति के समान होते हैं।
  • उन्तीस (29) से अठ्ठावन (58) तक के शब्द रूप भूभृत् के समान होते हैं।
  • उनसठ (59) से निन्यानवे (99) तक के शब्दों के शब्द रूप मति के समान होते हैं।
  • सौ(100), हजार(1000), लाख(100000), आदि प्राय: एकवचन नपुंसकलिंग होते हैं। इनके शब्द रूप फल के समान होते हैं।

संख्याएं – संस्कृत में गिनती

# पुँल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
1. एकः एका एकम्
2. द्वौ
3. त्रयः तिस्रः त्रीणि
4. चत्वारः चतस्रः चत्वारि
5. पञ्च
6. षट्
7. सप्त
8. अष्टौ अष्ट
9. नव
10. दश
11. एकादश
12. द्वादश
13. त्रयोदश
14. चतुर्दश
15. पञ्चदश
16. षोडश
17. सप्तदश
18. अष्टादश
19. ऊनविंशतिः एकोनविंशतिः नवदश
20. विंशतिः
21. एकविंशतिः
22. द्वाविंशतिः द्वाविंशः
23. त्रयोविंशतिः त्रयोविंशः
24. चतुविंशतिः चतुर्विंशः
25. पञ्चविंशतिः पञ्चविंशः
26. षड्विंशतिः षड्विंशः
27. सप्तविंशतिः सप्तविंशः
28. अष्टाविंशतिः अष्टाविंशः
29. ऊनत्रिंशत् एकोनत्रिंशत् नवविंशः, नवविंशतिः
30. त्रिंशत्
31. एकत्रिंशत्
32. द्वात्रिंशत्
33. त्रयस्त्रिंशत्
34. चतुस्त्रिंशत्
35. पञ्चत्रिंशत्
36. षट्त्रिंशत्
37. सप्तत्रिंशत
38. अष्टात्रिंशत्
39. ऊनचत्वारिंशत् एकोनचत्वारिंशत् नवत्रिंशत्
40. चत्वारिंशत्
41. एकचत्वारिंशत्
42. द्विचत्वारिंशत् द्वाचत्वारिंशत्
43. त्रिचत्वारिंशत् त्रयश्चत्वारिंशत्
44. चतुश्चत्वारिंशत्
45. पञ्चचत्वारिंशत्
46. षट्चत्वारिंशत्
47. सप्तचत्वारिंशत्
48. अष्टचत्वारिंशत् अष्टाचत्वारिंशत्
49. ऊनपञ्चाशत् एकोनपञ्चाशत् नवचत्वारिंशत्
50. पञ्चाशत्
51. एकपञ्चाशत्
52. द्विपञ्चाशत् द्वापञ्चाशत्
53. त्रिपञ्चाशत् त्रयःपञ्चाशत्
54. चतुष्पञ्चाशत्
55. पञ्चपञ्चाशत्
56. षट्पञ्चाशत्
57. सप्तपञ्चाशत्
58. अष्टपञ्चाशत् अष्टापञ्चाशत्
59. ऊनषष्ठिः एकोनषष्टिः नवपञ्चाशत्
60. षष्ठिः
61. एकषष्ठिः
62. द्विषष्ठि द्वाषष्ठिः
63. त्रिषष्ठिः त्रयःषष्ठिः
64. चतुःषष्ठिः
65. पञ्चषष्ठिः
66. षट्षष्ठिः
67. सप्तषष्ठिः
68. अष्टषष्ठिः अष्टाषष्ठिः
69. ऊनसप्ततिः एकोनसप्ततिः नवषष्ठिः
70. सप्ततिः
71. एकसप्ततिः
72. द्वासप्ततिः द्विसंप्ततिः
73. त्रयःसप्ततिः त्रिसप्ततिः
74. चतुःसप्ततिः
75. पञ्चसप्ततिः
76. षट्सप्ततिः
77. सप्तसप्ततिः
78. अष्टासप्ततिः अष्टसप्ततिः
79. ऊनाशीतिः एकोनाशीतिः नवसप्ततिः
80. अशीतिः
81. एकाशीतिः
82. द्वयशीतिः
83. त्र्यशीतिः
84. चतुरशीतिः
85. पञ्चाशीतिः
86. षडशीतिः
87. सप्ताशीतिः
88. अष्टाशीतिः
89. ऊननवतिः एकोननवतिः नवाशीतिः
90. नवतिः
91. एकनवतिः
92. द्विनवतिः द्वानवतिः
93. त्रयोनवतिः
94. चतुर्नवतिः
95. पञ्चनवतिः
96. षण्णवतिः
97. सप्तनवतिः
98. अष्टनवतिः अष्टानवतिः
99. नवनवतिः ऊनशतम् एकोनशतम्
100. शतम्। शतकम्

इसके आगे की संख्याओं के लिए:-

101 एकाधिकशतकम्
102 द्वयधिकशतकम्
103 त्र्यधिकशतम्
200 द्विशतम्, द्वे शते
300 त्रिशतम्, त्रीणि शतानि

और अधिक संस्कृत में गणना जानने के लिए पढ़ें – संस्कृत में गिनती

Related Posts

वृद्धि संधि – ब्रध्दिरेचि – Vriddhi Sandhi, Sanskrit Vyakaran

वृद्धि संधि वृद्धि संधि का सूत्र ब्रध्दिरेचि होता है। यह संधि स्वर संधि के भागो में से एक है। संस्कृत में स्वर संधियां आठ प्रकार की होती है। दीर्घ संधि,...Read more !

आज्ञा शब्द के रूप – Agya ke roop – Shabd Roop – Sanskrit

Agya Shabd आज्ञा शब्द : आकारांत स्त्रीलिंग संज्ञा, सभी आकारांत स्त्रीलिंग संज्ञापदों के रूप इसी प्रकार बनाते है। आज्ञा के रूप – Shabd Roop विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा आज्ञा...Read more !

जगत् शब्द के रूप – Jagat ke Roop – Sanskrit

जगत् के शब्द रूप जगत् शब्द (World, दुनिया): तकारान्त क्विवलिङ्ग शब्द , इस प्रकार के सभी नपुन्सकलिङ्ग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। जगत् के रूप...Read more !

ग्लौ शब्द रूप – Glau ke roop – Sanskrit (संस्कृत)

ग्लौ शब्द के रूप ग्लौ शब्द (चन्द्रमा/कपूर): औकारांत पुल्लिंग संज्ञा, सभी औकारांत पुल्लिंग संज्ञापदों के रूप इसी प्रकार बनाते है। ग्लौ के रूप – विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा ग्लौः...Read more !

अर्यमन् शब्द के रूप (Aryaman Ke Shabd Roop) – संस्कृत

Aryaman Shabd अर्यमन् शब्द (अर्यमा, सूर्य, बारह अदित्यों में से एक): अर्यमन् शब्द के नकारान्त पुल्लिंग शब्द के शब्द रूप, अर्यमन् (Aryaman) शब्द के अंत में ‘न्’ की मात्रा का...Read more !