लङ् लकार – (अनद्यतन भूत काल), वाक्य, उदाहरण, अर्थ – संस्कृत

Lang Lakar

लङ्ग् लकार

अनद्यतने लङ्– अनद्यतन भूत में लङ् लकार होता है, जो कार्य आज से पूर्व हो चुका है अर्थात् क्रिया आज समाप्त नहीं हुई बल्कि कल या उससे भी पूर्व हो चुकी है, वह अनद्यतन काल होता है।

लङ्ग् लकार धातु रूप उदाहरण

भू / भव् धातु

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमपुरुषः अभवत् अभवताम् अभवन्
मध्यमपुरुषः अभवः अभवतम् अभवत
उत्तमपुरुषः अभवम् अभवाव अभवाम

अस् (होना) धातु

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष आसीत् आस्ताम् आसन्
मध्यम पुरुष आसीः आस्तम् आस्त
उत्तम पुरुष आसम् आस्व आस्म

हस् धातु

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष अहसत् अहसताम् अहसन्
मध्यम पुरुष अहसः अहसतम् अहसत
उत्तम पुरुष अहसम् अहसाव अहसाम

पठ धातु

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष अपठत् अपठातम् अपठन्
मध्यम पुरुष अपठः अपठतम् अपठत
उत्तम पुरुष अपठम् अपठाव अपठाम

लङ्ग् लकार के उदाहरण

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष उसने पढ़ा।
स: अपठत्।
उन दोनों ने पढ़ा।
तौ अपठताम्।
उन सबने पढ़ा।
ते अपठन्।
मध्यम पुरुष तुमने पढ़ा।
त्वम् अपठः।
तुम दोनों ने पढ़ा।
युवाम् अपठतम्।
तुम सबने पढ़ा।
यूयं अपठत।
उत्तम पुरुष मैंने पढ़ा।
अहम् अपठम्।
हम दोनों ने पढ़ा।
आवाम् अपठाव।
हम सबने पढ़ा।
वयम् अपठाम्।
‘स्वर’ आगे होने पर ‘म’ का अनुस्वार नहीं होता है अतः यहाँ ‘अ’ स्वर होने के कारण ‘त्वम्’ आदि के ‘म’ को अनुस्वार नहीं किया गया है।

लङ्ग् लकार में अनुवाद or लङ्ग् लकार के वाक्य

  • कल मेरे पैर बहुत थक गए थे। – ह्यः मम चरणौ भूरि श्रान्तौ अभवताम्।
  • परसों मेरे टखनों में बहुत पीड़ा हुई। – परह्यः मम गुल्फयोः महती पीडा अभवत्।
  • इस कारण तुम भी दुःखी हुए। – अनेन कारणेन त्वम् अपि दुःखी अभवः।
  • अब दुःखी मत होओ। – सम्प्रति दुःखी मा स्म भवः।
  • तुम दोनों बीते वर्ष प्रथमश्रेणी में उत्तीर्ण हुए थे। – युवां व्यतीते वर्षे प्रथमश्रेण्याम् उत्तीर्णौ अभवतम्।

लङ्ग् लकार के अन्य हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद व उदाहरण

  • मैं तो अनुत्तीर्ण हो गया था भाई – अहं तु अनुत्तीर्णः अभवं भ्रातः
  • तुम सब प्रसन्न हुए थे। – यूयं प्रसन्नाः अभवत,
  • हम सब दुःखी हुए थे। – वयं खिन्नाः अभवाम।
  • मेरे दोनों घुटनों में बहुत दर्द हुआ। – मम जान्वोः महती पीडा अभवत्।
  • परसों मेरे गायन से सब लोग प्रसन्न हुए थे। – परह्यः मम गायनेन सर्वे जनाः प्रसन्नाः अभवन्।

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