कम्प्यूटर : महत्व एवं उपयोगिता – निबंध

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‘कम्प्यूटर : महत्व एवं उपयोगिता’ से मिलते जुलते शीर्षक इस प्रकार हैं-

  • कम्प्यूटर की उपयोगिता
  • कम्प्यूटर : यन्त्र मानव
  • कम्प्यूटर : दुनिया का भविष्य
  • भारत में कम्प्यूटर का प्रयोग
  • कम्प्यूटर और जीवन
  • कम्प्यूटर : आधुनिक यन्त्र पुरुष
  • कम्प्यूटर के उपयोग
  • कम्प्यूटर और इन्टरनेट
COMPUTER KA MAHATVA EVAM UPYOGITA

निबंध की रूपरेखा

  1. प्रस्तावना
  2. कम्प्यूटर का अर्थ
  3. कम्प्यूटर के उपयोग
  4. कम्प्यटर और इन्टरनेट
  5. कम्प्यूटरों से लाभ
  6. उपसंहार

कम्प्यूटर : महत्व एवं उपयोगिता

प्रस्तावना

वर्तमान युग को यदि कम्प्यूटर युग कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। आने वाले कुछ वर्षों में कंप्यूटर प्रत्येक घर में टी.वी. की तरह दिखाई देगा क्योंकि किसी का भी काम कम्प्यूटर के बिना चलने वाला नहीं है। जीवन के हर क्षेत्र में कम्प्यूटर की घुसपैठ हो गई है।

व्यवसाय, नौकरी, उद्योग, व्यापार, बीमा, बैंक रेल, हवाई यातायात, चिकित्सा, इन्जीनियरिंग शिक्षा, प्रबन्धन, सूचना तकनीक सर्वत्र कम्प्यूटर का बोलबाला है। सच तो यह है कि कम्प्यूटर अब आम जरूरत की चीज बन गई है।

आधुनिकीकरण की प्रक्रिया कम्प्यूटरों के उपयोग से जुड़ी हुई है। कम्प्यूटर के आविष्कार ने वैज्ञानिक प्रगति को एक नई दिशा दी है। विविध क्षेत्रों में विज्ञान एवं तकनीक ने जो आशातीत उन्नति की है उसका पूरा श्रेय कम्प्यूटर को है।

कम्प्यूटर का अर्थ

मोटे तौर पर कम्प्यूटर को वैज्ञानिक ढंग से विकसित यान्त्रिक बुद्धि कहा जा सकता है। मानव शरीर में मस्तिष्क जो कार्य निष्पादित करता है, वही कार्य कम्प्यूटर का है। यही नहीं अपितु मस्तिष्क को काम करने में जितना समय लगता है, कम्प्यूटर उससे कम समय में बिना कोई गलती किए हुए वही कार्य सम्पन्न कर देता है।

6 या 7 अंकों वाली संख्याओं के जोड़, बाकी, गुणा, भाग, वर्गमूल, आदि करने में कैलकुलेटर’ एक सेकण्ड का भी समय नहीं लेता जबकि मस्तिष्क इसे हल करने में कई मिनट का समय लेगा।

चार्ल्स बेवेज‘ ने 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में सर्वप्रथम पहला कम्प्यूटर निर्मित किया जो लम्बी-लम्बी गणनाएं करके उनके परिणामों को मुद्रित भी कर सकता था।

कम्प्यूटर के उपयोग

आज कम्प्यूटर का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। बैंकिंग क्षेत्र में यह हिसाब-किताब रखने का काम करता है। सूचना एवं समाचार प्रेषण के क्षेत्र में तो कम्प्यूटर प्रयोग से एक
क्रान्ति-सी आ गई है। दूरसंचार की दृष्टि से भी वे अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहे है। विज्ञान एवं तकनीक के अनुसन्धान क्षेत्र में, परमाणु ऊर्जा, अन्तरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में कम्प्यूटरों ने उपयोग में नई जानकारियां प्रदान की हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में भी कम्प्यूटरों का प्रयोग विविध रूपों में होने लगा है। कम्प्यूटर का अति विकसित रूप यन्त्र मानव या ‘रोबोट’ है जो ऐसे स्थानों पर काम करने में सक्षम है जहां मानव के जीवन को खतरा है। रेल की आरक्षण खिड़कियों पर अब कम्प्यूटर लग गए हैं। मौसम विज्ञान की भविष्यवाणियों में भी इनसे सहायता ली जा रही है। युद्ध एवं शान्ति दोनों में ही कम्प्यूटरों की विशेष भूमिका है।

कम्प्यूटरों का उपयोग वर्तमान भारत की मूलभूत आवश्यकता है। कुछ लोग भले ही इस आधार पर कम्प्यूटर का विरोध करें कि इस प्रक्रिया से देश में बेरोजगारी बढ़ेगी, किन्तु यह सच नहीं है। विकसित विश्व के साथ यदि हमें कदम-से-कदम मिलाकर चलना है तो कम्प्यूटरों को घर-घर तक पहुंचाना होगा।

कम्प्यूटर और इन्टरनेट

कम्प्यूटर के नेटवर्क को ‘इन्टरनेट‘ कहा जाता है। इन्टरनेट से जुड़े कम्प्यूटर को अपनी आवश्यकता के अनुरूप दूसरे कम्प्यूटर से सूचना ले सकने की सुविधा प्राप्त होती है। इस प्रकार सभी देशों के लोग इन्टरनेट सुविधा के द्वारा पारस्परिक सूचनाओं एवं आंकड़ों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

इन्टरनेट के द्वारा E-mail भी प्राप्त की जा सकती है तथा अलग-अलग स्थानों पर बैठे लोग आपस में ‘वीडियो कॉन्फ्रेन्स‘ भी कर सकते हैं। इन्टरनेट ने दुनिया को एक परिवार बना दिया है। विश्व के किसी भी हिस्से में होने वाली गतिविधि को अब इन्टरनेट के जरिए कहीं भी पहुंचाया जा सकता है। इन्टरनेट पर समाचार-पत्र भी उपलब्ध हैं तथा सूचनाओं का अथाह भण्डार विभिन्न वेबसाइटों पर प्राप्त है।

कम्प्यूटरों से लाभ

‘कम्प्यूटरों’ के उपयोग ने मानव जाति को विविध क्षेत्रों में अनेक लाभ पहुंचाए हैं। इन्टरनेट के द्वारा जहां हम पूरे विश्व से जुड़ गए हैं वहीं घर बैठे-बैठे कोई भी सूचना प्राप्त कर सकते हैं और सुदूर देशों में रहने वाले अपने मित्रों, सगे-सम्बन्धियों से बातचीत कर सकते हैं, उन्हें सन्देश भेज सकते हैं, ई-मेल कर सकते हैं। यह कम मूल्य पर उपलब्ध होने वाली ऐसी सेवा है जिसका अब भरपूर उपयोग किया जा रहा है।

कम्प्यूटर के विकास ने सूचना प्रौद्योगिकी को नए आयाम दिए हैं। संचार उपग्रह बिना कम्प्यूटर के काम नहीं कर सकते। मोबाइल फोन, सेटेलाइट फोन जैसी सुविधाएं इन्हीं संचार उपग्रहों से ही सम्भव हो सकी हैं।

कम्प्यूटर का प्राण तत्व है- माइक्रोचिप्स पर अंकित सूचनाएं। यह इसका ‘सॉफ्टवेयर‘ है। हम गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि आज भारत कम्प्यूटरों के ‘सॉफ्टवेयर’ निर्माण में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है। भारत इस क्षेत्र में निर्यात करके भारी विदेशी मुद्रा कमा रहा है।

कम्प्यूटर शिक्षा आज का फलता-फूलता व्यवसाय है। भारत में प्रति वर्ष लाखों की संख्या में कम्प्यूटर प्रोग्रामर’ एवं इस विषय के जानकार लोग प्रशिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जिनकी विदेशों में भारी मांग है। कम्प्यूटर व्यवसाय ने लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।

उपसंहार

कम्प्यूटर का निर्माण भी मानव मस्तिष्क ने ही किया है अतः यह व्यवहार में भले ही बुद्धि को पराजित कर दे, पर अन्ततः मानव बुद्धि का लोहा तो उसे मानना ही पड़ेगा। कम्प्यूटर और चाहे जो कुछ भी कर ले पर मानवीय अनुभूतियों, संवेदनाओं, विवेक, चिन्तन का स्रोत नहीं बन सकता।

यही मनुष्य की विशेषता है जो उसे यन्त्र से अलग करती है। कुछ भी हो, हमें कम्प्यूटरों के प्रयोग से आशंकित नहीं होना चाहिए अपितु इसका आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए तभी हम इक्कीसवीं सदी में मजबूती से अपने पैर जमा सकेंगे।

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