मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) – अर्थ, परिभाषा, स्वरूप

Mansik Swasthya

मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ

Meaning of Mental Health

बालकों में मानसिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित व्यवहार की अनेक समस्याएँ देखी जाती हैं। इससे परिवार तथा विद्यालय का वातावरण अव्यवस्थित हो जाता है। जिस बालक का व्यवहार असामान्य है, वह अवश्य ही मानसिक रूप से रुग्ण होगा।

स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। उदाहरण के लिये, कोई बालक प्रतिभाशाली या बुद्धि का तेज है, किन्तु वह थोड़ी-थोड़ी बात पर झुंझला जाता है तो वह बालक अवश्य ही मानसिक रूप से अस्वस्थ होगा अथवा ऐसा बालक शारीरिक रूप से विक्रत होगा।

मानसिक अस्वस्थता की दशा में कोई बालक सामान्य व्यवहार नहीं करता। न ही वह विभिन्न जटिल परिस्थितियों से समायोजन कर पाता है, जबकि मानसिक रूप से स्वस्थ बालक कठिनतम परिस्थितियों में सामंजस्य स्थापित कर लेता है, कठिन स्थिति में निदान का पथ खोज लेता है तथा उसका मन अध्ययन में लगता है।

मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक अपने विद्यालय, साथी तथा शिक्षकों के लिये सिर दर्द बन जाता है। बालक के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के अनेक कारण होते हैं। अत: बालक के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारणों का पता लगाकर उनका निदान करना अध्यापक का प्रमुख कार्य होता है।

बाल विकास तथा शिक्षा के विकास के लिये शिक्षक तथा बालक का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना शिक्षण प्रक्रिया का प्रथम कार्य है।

डॉ. सरयूप्रसाद चौबे के शब्दों में- “मानसिक रूप से स्वस्थ न रहने पर बालक का विकास कुण्ठित हो जाता है। मानसिक अस्वस्थता के कारण अनेक बालक समाज पर बोझ बने दिखायी देते हैं। इसीलिये हमारे जीवन में मानसिक स्वास्थ्य का महत्त्व शारीरिक स्वास्थ्य से कहीं कम नहीं है।

मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषाएँ

Definitions of Mental Health

  1. हेड फील्ड ने कहा है, “सम्पूर्ण व्यक्ति की सम्पूर्ण एवं समन्वित कार्यशीलता को मानसिक स्वास्थ्य कहा जाता है।”
  2. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संगठन, न्यूयार्क के अनुसार, “मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है कि बालक अपने कार्य में, शाला में, परिवार में, सहयोगियों तथा समुदाय के साथ ठीक प्रकार से रहे। इसका अभिप्राय प्रत्येक व्यक्ति के उस तरीके से हैं, जिसके द्वारा वह अपनी इच्छाओं, महत्त्वाकांक्षाओं, विचारों, भावनाओं और अन्तरात्मा का समन्वय करता है जिससे वह जीवन की उन माँगों को पूरा कर सके, जिनका उसे सामना करना है।”
  3. क्रो एवं क्रो का कथन है, “मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान वह विज्ञान है, जिसका सम्बन्ध मानव कल्याण से है और जो मानव सम्बन्धों के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है।”
  4. ड्रेवर के शब्दों में, “मानसिक स्वास्थ्य के नियमों की खोज करना और उसके संरक्षण के उपाय करना।”
  5. लेडेन के अनुसार, “मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है-वास्तविकता के धरातल पर वातावरण से सामंजस्य स्थापित करना।”

मानसिक स्वास्थ्य का स्वरूप

Nature of Mental Health

हमारा मुख्य ध्येय बालकों के मानसिक स्वास्थ्य को ठीक बनाये रखना है। अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के बिना बालकों की योग्यताओं का उचित विकास सम्भव नहीं है। जिन बालकों में भय, चिन्ता, निराशा तथा अन्य समायोजन दोषों का विकास हो जाता है। उनका मन पढ़ने में नहीं लगता और सीखने में उन्नति नहीं हो पाती।

इसके अतिरिक्त समायोजन दोष वाले बालक अनेक प्रकार की समस्याएँ रखते हैं जिनको समझने और समाधान के लिये प्रत्येक अध्यापक एवं अभिभावक को मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का ज्ञान अति आवश्यक है।

एक समय था जबकि बच्चे की बुद्धि, रुचि एवं मानसिक स्थिति की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था। उस समय शिक्षा पूर्णतया अध्यापक केन्द्रित थी और शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ‘थ्री आर‘ का ज्ञान देना था।

किन्तु अब शिक्षा का केन्द्र बालक बन गया है, उसकी मानसिक स्थति, रुचि एवं अन्य योग्यताओं को आधार मानकर ही पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है।

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बालक के मानसिक स्वास्थ्य में बाधक तत्त्व

बालक के मानसिक स्वास्थ्य को जो तत्त्व क्षीण कर देते हैं अथवा प्रभाव डालते हैं, वे इस प्रकार हैं – 1. वंशानुक्रम तत्त्व का प्रभाव-वंशानुक्रम दोषपूर्ण होने के कारण बालक मानसिक दुर्बलता, अस्वस्थता तथा एक विशेष प्रकार की मानसिक अस्वस्थता प्राप्त करता है। विस्तार से पढ़ें – बालक के मानसिक स्वास्थ्य में बाधक तत्त्व

मानसिक स्वास्थ्य सुधार के उपाय

बालक के मानसिक रूप से स्वस्थ न रहने के कारण उसके अन्दर असमायोजन उत्पन्न हो जाता है। इससे बालक पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वह समायोजन उचित रूप से नहीं कर पाता। उसकी क्षमता में कमी आ जाती है। विस्तार से पढ़ें – मानसिक स्वास्थ्य सुधार के उपाय

पढ़ें – संपूर्ण बाल विकास, Adhigam

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