बालक के मानसिक स्वास्थ्य में बाधक या प्रभाव डालने वाले तत्त्व

Balak Ke Mansik Swasthya Me Badhak Tatva

बालक के मानसिक स्वास्थ्य में बाधक तत्त्व

Obstructory Factors in Mental Health of Child

बालक के मानसिक स्वास्थ्य को जो तत्त्व क्षीण कर देते हैं अथवा प्रभाव डालते हैं, वे निम्न हैं-

1. वंशानुक्रम तत्त्व का प्रभाव

वंशानुक्रम दोषपूर्ण होने के कारण बालक मानसिक दुर्बलता, अस्वस्थता तथा एक विशेष प्रकार की मानसिक अस्वस्थता प्राप्त करता है। अत: वंशानुक्रम प्रभाव का प्रमुख घटक है। इस प्रकार बालक समायोजन करने में कठिनाई का अनुभव करता है।

2. शारीरिक अस्वस्थता का प्रभाव

जो बालक शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं, वे सामान्य जीवन में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते। अत: शारीरिक अस्वस्थता का घटक मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। शारीरिक स्वास्थ्य अनुकूल होने की दशा में ही मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है।

3. शारीरिक दोषों का प्रभाव

बालक के शारीरिक दोष विकलांगता अथवा किसी प्रकार शारीरिक विकृतियाँ बालक के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे बालक हीनता तथा कुण्ठाओं से ग्रसित होते हैं। इस प्रकार वे समाज से समायोजन नहीं कर पाते।

4. पारिवारिक परिस्थितियों का प्रभाव

इसमें पारिवारिक विघटन, परिवार की अनुशासनहीनता, निर्धनता, संघर्ष, माता-पिता का परस्पर दुर्व्यवहार इत्यादि अनेक घटक आते हैं। इन बाधक तत्त्वों के कारण बालकों का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता।

कुछ माता-पिता अपने बालकों को बहुत लाड़-दुलार देते हैं। उन्हें अधिक विलासी साधन उपलब्ध कराते हैं। इससे उनकी मनोवृत्ति असामान्य हो जाती है।

कुछ नौकरी तथा व्यवसाय से अधिक व्यस्त रहने के कारण भली प्रकार ध्यान नहीं दे पाते अथवा बालकों को छात्रावासों में भर्ती कर देते हैं। प्यार के अभाव में भी बालकों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है

इन सभी बाधक तत्त्वों के कारण बालक असामान्य हो जाते हैं। इस कारण वे परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते।

5. विद्यालयी वातावरण का प्रभाव

विद्यालयी वातावरण; जैसे-भेद-भाव, छुआछूत, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अभाव, इच्छा, दमन, पाठ्यक्रम-सहगामी क्रियाओं का अभाव, भय,आतंक आदि तत्त्व बालक के मानसिक स्वास्थ्य को खराब करते हैं।

अनुशासन की कठोरता, दोषपूर्ण पाठ्यक्रम, नीरस शिक्षण विधियाँ, अमनोवैज्ञानिक प्रणालियाँ, परीक्षा प्रणाली का दोषपूर्ण होना, पुरस्कार वितरण में भेद-भाव, कक्षा का दूषित वातावरण, जलवायु एवं प्रकाश व्यवस्था का अभाव, छोटी-छोटी त्रुटियों पर भारी दण्ड की व्यवस्था, शिक्षक का नीरस एवं कठोर व्यवहार एवं पक्षपातपूर्ण रवैया आदि बाधक तत्त्व बालक के मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर देते हैं एवं उनकी उन्नति में बाधक होते हैं।

बालक की रुचियाँ चूंकि प्रमुख होती हैं अत: रुचि के अनुसार कार्य न देना भी मानसिक स्वास्थ्य की विकृति का प्रतीक है।

6. मनोरंजन तथा सांस्कृतिक क्रिया कलापों के अभाव का प्रभाव

बालक मनोरंजन, जिज्ञासा तथा खेलप्रिय होते हैं। यदि उनको यह साधन उपलब्ध नहीं कराये जाते तो मानसिक रूप से अस्वस्थता का अनुभव करते हैं। वे निराश तथा नीरस हो जाते हैं। उनका मानसिक सन्तुलन बिगड़ जाता है। अत: यह बिन्दु भी विचारणीय हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य

बालकों में मानसिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित व्यवहार की अनेक समस्याएँ देखी जाती हैं। इससे परिवार तथा विद्यालय का वातावरण अव्यवस्थित हो जाता है। जिस बालक का व्यवहार असामान्य है, वह अवश्य ही मानसिक रूप से रुग्ण होगा। विस्तार से पढ़ें – मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य सुधार के उपाय

बालक के मानसिक रूप से स्वस्थ न रहने के कारण उसके अन्दर असमायोजन उत्पन्न हो जाता है। इससे बालक पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वह समायोजन उचित रूप से नहीं कर पाता। उसकी क्षमता में कमी आ जाती है। विस्तार से पढ़ें – मानसिक स्वास्थ्य सुधार के उपाय

पढ़ें – संपूर्ण बाल विकास

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