भारतेंदु युग के कवि और उनकी रचनाएँ – रचना एवं रचनाकार

BHARTENDU YUG KE KAVI AUR RACHNAYE

भारतेंदु युग का साहित्य अनेक अमूल्य रचनाओं का सागर है, इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी भाषा का नहीं है और न ही किसी अन्य भाषा की परम्परा का साहित्य एवं रचनाएँ
अविच्छिन्न प्रवाह के रूप में इतने दीर्घ काल तक रहने पाई है। भारतेंदु युग के कवि और उनकी रचनाएँ; भारतेंदु युग की रचनाएँ और रचनाकार उनके कालक्रम की द्रष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। भारतेंदु युग की मुख्य रचना एवं रचयिता या रचनाकार इस list में नीचे दिये हुए हैं। भारतेंदु युग के कवि और उनकी रचनाएँ –

भारतेंदु युग के कवि और उनकी रचनाएँ

क्रम रचनाकार भारतेन्दुयुगीन रचना
1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रेम मालिका, प्रेम सरोवर, गीत गोविन्दानन्द, वर्षा विनोद, विनय प्रेम पचासा, प्रेम फुलवारी, वेणु गीति; दशरथ विलाप, फूलों का गुच्छा (खड़ी बोली में)
2. बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ जीर्ण जनपद, आनन्द अरुणोदय, हार्दिक हर्षादर्श, मयंक महिमा, अलौकिक लीला, वर्षा बिन्दु, लालित्य लहरी, बृजचन्द पंचक
3. प्रताप नारायण मिश्र प्रेमपुष्पावली, मन की लहर, लोकोक्ति शतक, तृप्यन्ताम्, शृंगार विलास, दंगल खंड, ब्रेडला स्वागत
4. जगमोहन सिंह प्रेमसंपत्ति लता, श्यामालता, श्यामा सरोजिनी, देवयानी, ऋतु संहार, मेघदूत
5. अम्बिका दत्त व्यास पावस पचासा, सुकवि सतसई, हो हो होरी
6. राधा कृष्ण दास कंस वध (अपूर्ण), भारत बारहमासा, देश दशा

भारतेन्दु युग (1850 ई०-1900 ई०)

भारतेन्दु युग का नामकरण हिन्दी नवजागरण के अग्रदूत
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाम पर किया गया है।

भारतेन्दु युग की प्रवृत्तियाँ- 1. नवजागरण, 2. सामाजिक
चेतना, 3. भक्ति भावना, 4. शृंगारिकता, 5. रीति निरूपण,
6. समस्या-पूर्ति ।

भारतेन्दु युग में भारतेन्दु को केन्द्र में रखते हुए अनेक कृती
साहित्यकारों का एक उज्ज्वल मंडल प्रस्तुत हुआ, जिसे
‘भारतेन्दु मण्डल’ के नाम से जाना गया। इसमें भारतेन्दु
के समानधर्मा रचनाकार थे। इस मंडल के रचनाकारों ने
भारतेन्दु से प्रेरणा ग्रहण की और हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि
का काम किया।

भारतेन्दु मंडल के प्रमुख रचनाकार

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
प्रताप नारायण मिश्र, बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’, बाल
कृष्ण भट्ट, अम्बिका दत्त व्यास, राधा चरण गोस्वामी, ठाकुर
जगमोहन सिंह, लाला श्री निवास दास, सुधाकर द्विवेदी,
राधा कृष्ण दास आदि ।

इस प्रष्ठ में भारतेंदु युग का साहित्य, काव्य, रचनाएं, रचनाकार, साहित्यकार या लेखक दिये हुए हैं। भारतेंदु युग की प्रमुख कवि, काव्य, गद्य रचनाएँ एवं रचयिता या रचनाकार विभिन्न परीक्षाओं की द्रष्टि से बहुत ही उपयोगी है।

Related Posts

प्रयोगवाद – जन्म, कवि, विशेषताएं, प्रवृत्तियाँ – प्रयोगवादी काव्य धारा

प्रयोगवाद प्रयोगवाद (1943 ई० से…) : यों तो प्रयोग हरेक युग में होते आये हैं किन्तु ‘प्रयोगवाद’ नाम कविताओं के लिए रूढ़ हो गया है जो कुछ नये बोधों, संवेदनाओं...Read more !

कबीर दास के दोहे – Kabir Das Ke Dohe – Dohe In Hindi

सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय कबीर के दोहे इस प्रष्ठ मे सम्मिलित किए गए हैं। हम कबीर के अधिक से अधिक दोहों को संकलित करने हेतु प्रयासरत हैं। चाह मिटी, चिंता...Read more !

हिन्दी साहित्य के अति महत्वपूर्ण 250 प्रश्न उत्तर

इस पृष्ठ में हिन्दी साहित्य के अति महत्वपूर्ण 250 प्रश्न-उत्तर आप जानेंग। ये प्रश्न अक्सर परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। साथ ही साथ इन प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।...Read more !

रीति काल – उत्तर मध्य काल – हिंदी साहित्य का इतिहास

रीतिकाल या मध्यकालीन साहित्य उत्तर मध्य काल हिंदी साहित्य का इतिहास या रीतिकाल साहित्य (Reetikaal Hindi Sahitya Ka Itihas – 1650 ई०- 1850 ई०):  नामांकरण की दृष्टि से उत्तर-मध्यकाल हिंदी साहित्य...Read more !

कुमाउनी, गढ़वाली, मेवाती – पहाड़ी हिन्दी की बोलियाँ – हिन्दी भाषा

पहाड़ी हिन्दी पहाड़ी का विकास ‘खस’ प्राकृत से माना जाता है। सर जार्ज ग्रियर्सन ने इसे  ‘मध्य पहाड़ी’ नाम से सम्बोधित किया है। पहाड़ी हिन्दी कुमाऊँ और गढ़वाल प्रदेश की...Read more !