त्वरित अपरदन (Accelerated Erosion) मृदा संरक्षण के सन्दर्भ में प्रयुक्त एक शब्द, जो भू-वैज्ञानिक मानक की अपेक्षा अधिक दर से होने वाले अपरदन को व्यक्त करता है। इसमें जितना अपरदन प्राकृतिक वातावरण के प्रभाव के अन्तर्गत होना चाहिए, उससे कहीं अधिक होता है। ऐसा वनस्पति आवरण के नष्ट होने से या मनुष्य की कुछ विशेष क्रियाओं के फलस्वरूप होता है।
अपरदन (erosion) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें चट्टानों का टूटना और उससे उत्पन्न ढीले पदार्थों का जल, वायु, हिम आदि के माध्यम से स्थानांतरित होना शामिल है। इस प्रक्रिया में वायु, जल, हिमनद, और समुद्री लहरों का प्रमुख योगदान होता है।
समुद्रतट पर लहरों और ज्वार-भाटा की गतिविधियों के कारण भूमि का क्षरण होता है, जिससे पृथ्वी का हिस्सा टूटकर समुद्र में समा जाता है। मिट्टी और कोमल चट्टानों के साथ-साथ कठोर चट्टानों का भी धीरे-धीरे क्षरण होता है। वर्षा और हिमपात भी इस प्रक्रिया में सहायक होते हैं। वर्षा के पानी में घुले गैसों की रासायनिक क्रिया के कारण कठोर चट्टानों का अपक्षय होता है। यह पानी जमीन में प्रवेश कर घुलनशील पदार्थों को भी घोलकर बहा ले जाता है।
वर्षा, पिघली हुई बर्फ, और हिम निरंतर भूमि का क्षरण करते रहते हैं। टूटे हुए पदार्थ छोटी नदियों से होते हुए बड़ी नदियों और अंततः समुद्र तक पहुँचते हैं।
नदियों के बहते जल के कारण किनारों और नदी की तलहटी का कटाव होता है, जिससे ऊँची जगहों से मिट्टी नीचे की ओर बहती है और अंततः समुद्र में पहुंच जाती है। इसके साथ ही, नदियों के जल में मिट्टी के अलावा घुले हुए लवण भी होते हैं।
शुष्क क्षेत्रों में, जहाँ वनस्पति नहीं होती, वहाँ वायु बड़ी मात्रा में बालू को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है। उदाहरण के लिए, सहारा मरुस्थल की रेत एक ओर सिसिली द्वीप तक और दूसरी ओर नाइजीरिया के समुद्र तट तक पहुँचती है। वायु द्वारा उड़ाया गया बालू चट्टानों के कोमल हिस्सों को काटकर उनकी आकृति बदल देता है। जहाँ जल हमेशा ऊँचाई से निचले स्थानों की ओर बहता है, वहीं वायु द्वारा उड़ाया गया मिट्टी ऊँचाई पर भी पहुँच सकता है।
हिम, जब चट्टानों के ऊपर से गुजरता है, तो उनका क्षरण करता है और उससे उत्पन्न पदार्थ को अपने साथ ले जाता है। ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर, पृथ्वी के बाकी हिस्सों में हिम द्वारा अपरदन की क्रिया अपेक्षाकृत कम होती है, खासकर वायु और नदियों के कार्य की तुलना में।
त्वरित अपरदन का अर्थ और परिभाषा
त्वरित अपरदन (Accelerated Erosion) वह प्रक्रिया है जिसमें मानव गतिविधियों या अन्य बाहरी कारकों के कारण भूमि का क्षरण सामान्य प्राकृतिक अपरदन से कहीं अधिक तेज गति से होता है। यह आमतौर पर कृषि, वनों की कटाई, निर्माण कार्य, खनन, और गलत जल प्रबंधन जैसी गतिविधियों से उत्पन्न होता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
परिभाषा: त्वरित अपरदन वह अपरदन प्रक्रिया है, जो मानव हस्तक्षेप या अन्य बाहरी कारकों के कारण सामान्य प्राकृतिक अपरदन दर से अधिक तीव्रता से होती है, जिससे भूमि की गुणवत्ता और स्थिरता में तेजी से गिरावट आती है।
त्वरित अपरदन के कारण, प्रभाव और समाधान
त्वरित अपरदन के कारण: त्वरित अपरदन मुख्यतः मानव गतिविधियों के कारण होता है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं-
- वनों की कटाई (Deforestation): पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे मिट्टी आसानी से बह जाती है।
- अधिक चराई (Overgrazing): पशुओं की अधिक चराई से भूमि की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है, जो अपरदन को बढ़ावा देती है।
- अवैज्ञानिक खेती (Unsustainable Farming Practices): कृषि के दौरान गलत तरीकों का उपयोग, जैसे ढलानों पर सीधी जुताई या अधिक सिंचाई, मिट्टी के कटाव को बढ़ाते हैं।
- निर्माण कार्य (Construction Activities): निर्माण कार्यों के लिए बड़े क्षेत्रों की खुदाई और समतलीकरण से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना टूटती है, जिससे तेज अपरदन होता है।
- खनन (Mining): खनन गतिविधियों से भूमि की सतह को नुकसान पहुँचता है और मिट्टी को ढीला कर देता है, जिससे अपरदन तेज हो जाता है।
- गलत जल प्रबंधन (Poor Water Management): जल प्रबंधन की गलत योजनाएं, जैसे जल का अधिक उपयोग या अपर्याप्त जल निकासी, मिट्टी को कमजोर कर देती हैं।
त्वरित अपरदन का प्रभाव:
- मिट्टी की उर्वरता का नुकसान: त्वरित अपरदन से मिट्टी की ऊपरी उर्वर परत नष्ट हो जाती है, जिससे कृषि उत्पादकता कम हो जाती है।
- जल संसाधनों का ह्रास: मिट्टी के कटाव से जल निकायों में गाद जम जाती है, जिससे जल की गुणवत्ता और मात्रा प्रभावित होती है।
- भूमि का बंजर होना: अत्यधिक अपरदन के कारण भूमि उपयोग के योग्य नहीं रहती और बंजर हो जाती है।
- पर्यावरणीय असंतुलन: त्वरित अपरदन से पारिस्थितिक तंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे वन्य जीवों के आवास नष्ट हो जाते हैं।
- बाढ़ और भूस्खलन का खतरा: जब मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है, तो वर्षा के समय बाढ़ और भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है।
त्वरित अपरदन से बचाव के उपाय (समाधान):
- वनरोपण (Afforestation): अधिक से अधिक पेड़ लगाना और वनों का संरक्षण करना अपरदन रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
- सामूहिक चराई नियंत्रण (Controlled Grazing): पशुओं की चराई को सीमित करना और चराई के क्षेत्र को बदल-बदलकर उपयोग करना आवश्यक है।
- संवहनीय कृषि पद्धतियां (Sustainable Farming Practices): ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेती, फ़सल चक्रीकरण और जैविक खाद का उपयोग मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायक हैं।
- जल प्रबंधन (Water Management): जल के बेहतर प्रबंधन के लिए तालाब, बाँध, और जल-संग्रहण संरचनाओं का निर्माण करना चाहिए।
- ढलानों पर पौधारोपण (Planting on Slopes): ढलान वाले क्षेत्रों में पेड़-पौधों का रोपण करना मिट्टी को बांधकर रखने में मदद करता है।
- नियमित भूमि संरक्षण योजनाएं (Regular Land Conservation Programs): सरकार और स्थानीय स्तर पर भूमि संरक्षण के लिए जागरूकता और योजनाओं का क्रियान्वयन जरूरी है।
त्वरित अपरदन एक गंभीर समस्या है, जो न केवल मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करती है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी उत्पन्न करती है। इसके रोकथाम के लिए प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण अनिवार्य है।