UPTET Syllabus: 2022-23

UPTET 2022-23 की तैयारी के लिए ये Syllabus और Exam Pattern बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में UPTET की यह Exam बर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। परंतु कुछ बर्ष पूर्व तक यह Exam दो बार आयोजित की जाती थी। यहाँ पर आगामी UPTET के Syllabus की पूरी जानकारी Hindi में दी गई है। साथ ही साथ इस Syllabus की आप PDF File भी download कर सकते हैं।

UPTET Syllabus PDF

जो प्रशिक्षु UPTET 2022-23 के लिए तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह परीक्षा की रूपरेखा (Exam Pattern) जानना बहुत आवश्यक हो जाता है। इसीलिए यहाँ आपको UPTET का Syllabus और Exam Pattern को Hindi में दिया गया है।

दोनों परीक्षाओ के लिए समय 150 मिनट, यानि 2.30 घंटे तय किए गए है।

Exam Pattern for Paper 1: Primary

UP TET Primary Level Exam Pattern:

विषय प्रश्‍नों की संख्‍या (अंक)
बाल विकास एवं अध्‍यापन 30 प्रश्न (30 अंक)
भाषा – 1 (हिन्‍दी) 30 प्रश्न (30 अंक)
भाषा – 2
(अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत में से कोई एक)
30 प्रश्न (30 अंक)
पर्यावरण अध्ययन 30 प्रश्न (30 अंक)
गणित 30 प्रश्न (30 अंक)
कुल 150 प्रश्न (150 अंक)

Exam Pattern for Paper 2: Junior

UP TET Junior Level Exam Pattern:

विषय प्रश्‍नों की संख्‍या (अंक)
बाल विकास एवं अध्‍यापन 30 प्रश्न (30 अंक)
भाषा – 1 (हिन्‍दी) 30 प्रश्न (30 अंक)
भाषा – 2
(अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत में से कोई एक)
30 प्रश्न (30 अंक)
विज्ञान एवं गणित
या
सामाजिक विज्ञान
60 प्रश्न (60 अंक)
कुल 150 प्रश्न (150 अंक)

UPTET के Exam में कोई भी Minus Marking नहीं होती हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित किया गया है।

PAPER 1: UPTET Primary Level Syllabus

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कक्षा 1 से 5 तक (6 से 11 आयु समूह) के लिए प्रासंगिक।

Prathmik Star UPTET Syllabus

पेपर I (कक्षा I से V) प्राथमिक स्तर के लिए UPTET Syllabus:

1. बाल विकास और शिक्षण विधियां [30 प्रश्न]

बाल विकास:

  1. बाल विकास का अर्थ एवं परिभाषा, आवश्यकता तथा क्षेत्र।
  2. बाल विकास की अवस्थाएं:
    1. शारीरिक विकास,
    2. मानसिक विकास,
    3. संवेगात्मक विकास।
  3. भाषा विकास- अभिव्यक्ति क्षमता का विकास, सृजनात्मकता एवं सृजनात्मक क्षमता का विकास।
  4. बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक- वंशानुक्रम, वातावरण। (पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयीय, संचार माध्यम)

सीखने का अर्थ तथा सिद्धान्त:

  1. अधिगम (सीखने) का अर्थ प्रभावित करने वाले कारक,अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ।
  2. अधिगम के नियम- थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियम एवं अधिगम में उनका महत्व।
  3. अधिगम के प्रमुख सिद्धान्त तथा कक्षा शिक्षण में इनकी व्यावहारिक उपयोगिता:
    1. थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धान्त,
    2. पैवलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त,
    3. स्किनर का क्रिया प्रसूत अधिगम सिद्धान्त
    4. कोहलर का सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धान्त,
    5. प्याजे का सिद्धान्त,
    6. व्योगास्की का सिद्धान्त
  4. सीखने का वक्र- अर्थ एवं प्रकार, सीखने में पठार का अर्थ और कारण एवं निराकरण।

शिक्षण एवं शिक्षण विधियाँ:

  1. शिक्षण का अर्थ, परिभाषा तथा उद्देश्य,
  2. सम्प्रेषण,
  3. शिक्षण के सिद्धान्त,
  4. शिक्षण के सूत्र,
  5. शिक्षण प्रविधियाँ,
  6. शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम),
  7. सूक्ष्म शिक्षण एवं शिक्षण के आधारभूत कौशल।

समावेशी शिक्षा निर्देशन एवं परामर्श:

  1. शैक्षिक समावेशन से अभिप्राय, पहचान, प्रकार, निराकरण यथाः अपवंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, वर्ण, लिंग, शारीरिक दक्षता (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं वाक् /अस्थिबाधित), मानसिक दक्षता।
  2. समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी0एल0एम0 एवं अभिवृत्तियाँ।
  3. समावेशित बच्चों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी।
  4. समावेशित बच्चों के लिए विशेष शिक्षण विधियाँ। यथा- ब्रेललिपि आदि।
  5. समावेशी बच्चों हेतु निर्देशन एवं परामर्श- अर्थ, उद्देश्य, प्रकार, विधियाँ, आवश्यकता एवं क्षेत्र।
  6. परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थायें:
    1. मनोविज्ञानशाला उ. प्र., प्रयागराज,
    2. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र (मण्डल स्तर पर),
    3. जिला चिकित्सालय,
    4. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षत डायट मेण्टर,
    5. पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र,
    6. समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ,
    7. सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन।
  7. बाल-अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व

अधिगम और अध्यापन:

  1. बालक किस प्रकार सोचते और सीखते हैं, बालक विद्यालय प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों असफल होते हैं।
  2. अधिगम और अध्यापन की बुनियादी प्रक्रियाएं:
    1. बालकों की अधिगम कार्यनीतियां,
    2. सामाजिक क्रियाकलाप के रूप में अधिगम,
    3. अधिगम के सामाजिक संदर्भ।
  3. एक समस्या समाधानकर्ता और एक वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में बालक।
  4. बालकों में अधिगम की वैकल्पिक संकल्पना, अधिगम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरणों के रूप में बालक की त्रुटियों को समझना।
  5. बोध और संवेदनाएं
  6. प्रेरणा और अधिगम,
  7. अधिगम में योगदान देने वाले कारक – निजी एवं पर्यावरणीय।

2. भाषा I: Hindi Syllabus For UPTET [30 प्रश्न]

हिन्दी की विषय-वस्तु (Hindi Syllabus)

  1. अपठित अनुच्छेद
  2. हिंदी वर्णमाला (स्वर, व्यंजन)
  3. वर्णों के मेल से मात्रिक तथा अमात्रिक शब्दों की पहचान
  4. वाक्य रचना
  5. हिंदी की सभी ध्वनियों के पारस्परिक अंतर की जानकारी विशेष रूप से – ष, स, ब, व, ढ, ड, क्ष, छ, ण तथा न की ध्वनियाँ
  6. हिंदी भाषा की सभी ध्वनियों, वर्णों अनुस्वार एव चन्द्रबिंदु में अंतर
  7. संयुक्ताक्षर एवं अनुनासिक ध्वनियों के प्रयोग से बने शब्द
  8. सभी प्रकार की मात्राएँ
  9. विराम चिह्नों यथा – अल्प विराम, अर्द्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयबोधक, चिह्नों का प्रयोग
  10. विलोम, समानार्थी, तुकान्त, अतुकान्त, सामान, ध्वनियों वाले शब्द
  11. वचन, लिंग एव काल
  12. प्रत्यय, उपसर्ग, तत्सम तद्भव व देशज, शब्दों की पहचान एव उनमें अंतर
  13. लोकोक्तियाँ एव मुहावरों के अर्थ
  14. सन्धि:
    1. स्वर सन्धि – दीर्घ सन्धि, गुण सन्धि, वृद्धि सन्धि, यण सन्धि, अयादि सन्धि
    2. व्यंजन सन्धि
    3. विसर्ग सन्धि
  15. वाच्य, समान एव अंलकार के भेद
  16. कवियों एव लेखकों की रचनाएँ

हिन्दी भाषा विकास का अध्यापन (Hindi Pedagogy)

  1. अधिगम और अर्जन भाषा अध्यापन के सिद्धांत
  2. सुनने और बोलने की भूमिकाः भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
  3. मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर निर्णायक संदर्श।
  4. एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां; भाषा की कठिनाईयां, त्रुटियां और विकार।
  5. भाषा कौशल।
  6. भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करना: बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
  7. अध्यापन – अधिगम सामग्रियां: पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन।
  8. उपचारात्मक अध्यापन।

3. भाषा II (संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू में से कोई एक) [30 प्रश्न]

संस्कृत की विषय-वस्तु (UPTET Sanskrit Syllabus):

  1. अपठित अनुच्छेद
  2. संज्ञाएँ (शब्द रूप):
    1. अकारान्त पुल्लिंग शब्द रूप।
    2. आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द रूप।
    3. अकारान्त नपुंसकलिंग शब्द रूप।
    4. ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द रूप।
    5. उकारान्त पुल्लिंग शब्द रूप।
    6. ऋकारान्त पुल्लिंग शब्द रूप।
    7. ऋकारान्त स्त्रीलिंग शब्द रूप।
  3. घर, परिवार, परिवेश, पशु, पक्षियों, घरेलू, उपयोग की वस्तुओं के संस्कृत नामों से परिचय ।
  4. सर्वनाम ।
  5. क्रियाएँ एवं उनके धातु रूप
  6. शरीर के प्रमुख अंगों के संस्कृत शब्दों का प्रयोग।
  7. अव्यय ।
  8. सन्धि- सरल शब्दों की सन्धि तथा उनका विच्छेद् (दीर्घ सन्धि)।
  9. संख्याएँ- संस्कृत में संख्याओं का ज्ञान
  10. लिंग, वचन, प्रत्याहार, स्वर के प्रकार, व्यंजन के प्रकार, अनुस्वार एवं अनुनासिक व्यंजन।
  11. स्वर व्यंजन एवं विसर्ग सन्धियाँ, समास, उपसर्ग, पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द, कारक, प्रत्यय एवं वाच्य ।
  12. कवियों एवं लेखकों की रचनाएँ ।

अंग्रेज़ी की विषय-वस्तु (UPTET English Syllabus):

  1. Unseen Passage
  2. The Sentence (A) Subject And Predicate (B) Kinds of Sentences
  3. Parts of Speech
    1. Kinds of Noun
    2. Pronoun
    3. Adverb
    4. Adjective
    5. Verb
    6. Preposition
    7. Conjunction
  4. Tenses – Present, Past, Future
  5. Articles
  6. Punctuation
  7. Word Formation
  8. Active & Passive Voice
  9. Singular & Plural
  10. Gender

उर्दू की विषय-वस्तु (UPTET Urdu Syllabus):

  1. अपठित अनुच्छेद।
  2. ज़बान की फन्नी महारतों की मालूमात।
  3. मशहूर अदीबों एवं शायरों की हालाते जिन्दगी एवं उनकी रचनाओं की जानकारी।
  4. मुखतलिफ असनाफे अदब जैसे, मजमून, अफसाना मर्सिया, मसनवी दास्तान वगैरह की तारीफ मअ, अमसाल।
  5. सही इमला एवं तलफ्फुज की मश्क।
  6. इस्म, जमीर, सिफत, मुतज़ाद अल्फाज, वाहिद, जमा, मोजक्कर, मोअन्नस वगैरह की ।
  7. जानकारी। सनअते. (तशबीह व इस्तआरा, तलमीह, मराअतुन्नजीर) वगैरह।
  8. मुहावरें, जर्बुल अमसाल की मालूमात।
  9. मखतलिफ समाजी मसायल जैसे माहौलियाती आलूदगी जिन्सी नाबराबरी, नाख्वान्दगी, तालीम बराएअम्न, अदमे, तगजिया, वगैरह की मालूमात।
  10. नज्मो, कहानियों, हिकायतों एवं संस्मरणों में मौजूद समाजी एवं एखलाकी अकदार को समझना।

भाषा विकास का अध्यापन (Pedagogy) (II)

  1. अधिगम और अर्जन भाषा अध्यापन के सिद्धांत
  2. सुनने और बोलने की भूमिका; भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
  3. मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर निर्णायक संदर्श,
  4. एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां: भाषा की कठिनाइयां, त्रुटियां और विकार भाषा कौशल भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करना: बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना,
  5. अध्यापन अधिगम सामग्री पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन,
  6. उपचारात्मक अध्यापन।

4. गणित [30 प्रश्न]

गणितीय विषय-वस्तु (UPTET Math Syllabus)

  1. संख्याएँ एवं संख्याओं का जोड़, घटाना, गुणा, भाग।
  2. लघुत्तम समापवर्त्य एवं महत्तम समापवर्तक ।
  3. भिन्नों का जोड़, घटाना, गुणा एवं भाग।
  4. दशमलव -जोड़, घटाना, गुणा व भाग।
  5. ऐकिक नियम।
  6. प्रतिशत।
  7. लाभ-हानि।
  8. साधारण ब्याज ।
  9. ज्यामिति-ज्यामितीय आकृतियाँ एवं पृष्ठ, कोण, त्रिभुज, वृत्त ।
  10. धन (रूपया-पैसा)।
  11. मापन – समय, तौल, धारिता, लम्बाई एवं ताप।
  12. परिमिति (परिमाप) – त्रिभुत. आयत, वर्ग, चतुर्भुज।
  13. कैलेण्डर।
  14. आंकड़े।
  15. आयतन, धारिता-घन, घनाभ।
  16. क्षेत्रफल – आयत, वर्ग।
  17. रेलवे या बस समय-सारिणी।
  18. आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण एवं निरूपण।

गणितीय अध्यापन संबंधी मुद्दे (Math Pedagogy)

  1. गणितीय/तार्किक चिंतन की प्रकृति, बालक के चिंतन एवं तर्कशक्ति पैटर्नी तथा अर्थ निकालने और अधिगम की कार्यनीतियों को समझना
  2. पाठ्यचर्या में गणित का स्थान।
  3. गणित की भाषा।
  4. सामुदायिक गणित।
  5. औपचारिक एवं अनौपचारिक पद्धतियों के माध्यम से मूल्यांकन।
  6. शिक्षण की समस्याएं।
  7. त्रुटि विश्लेषण तथा अधिगम एवं अध्यापन के प्रासंगिक पहलू।
  8. नैदानिक एवं उपचारात्मक शिक्षण।

5. पर्यावरणीय अध्ययन [30 प्रश्न]

पर्यावरण अध्ययन- विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र एवं पर्यावरण

  1. परिवार।
  2. भोजन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता।
  3. आवास।
  4. पेड़-पौधे एवं जन्तु।
  5. हमारा परिवेश।
  6. मेला ।
  7. स्थानीय पेशे से जुड़े व्यक्ति एवं व्यवसाय ।
  8. जल। यातायात एवं संचार।
  9. खेल एवं खेल भावना।
  10. भारत -नदियाँ, पर्वत, पठार, वन, यातायात, महाद्वीप, एवं महासागर ।
  11. हमारा प्रदेश-नदियाँ, पर्वत, पठार, वन, यातायात ।
  12. संविधान ।
  13. शासन व्यवस्था स्थानीय स्वशासन, ग्राम-पंचायत, नगर-पंचायत, जिला-पंचायत, नगरपालिका, नगर-निगम, जिला-प्रशासन, प्रदेश की शासन व्यवस्था, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, राष्ट्रीय पर्व, राष्ट्रीय-प्रतीक, मतदान, राष्ट्रीय एकता।
  14. पर्यावरण-आवश्यकता, महत्व एवं उपयोगिता. पर्यावरण-संरक्षण, पर्यावरण के प्रति सामाजिक दायित्वबोध, पर्यावरण संरक्षण हेतु संचालित योजनाएँ ।

पर्यावरणीय अध्यापन संबंधी मुद्दे (EVS Pedagogy)

  1. पर्यावरणीय अध्ययन की अवधारणा और व्याप्ति।
  2. पर्यावरणीय अध्ययन का महत्व, एकीकृत पर्यावरणीय अध्ययन।
  3. पर्यावरणीय अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा।
  4. अधिगम सिद्धांत।
  5. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की व्याप्ति और संबंध।
  6. अवधारणा प्रस्तुत करने के दृष्टिकोण।
  7. क्रियाकलाप।
  8. प्रयोग/व्यावहारिक कार्य चर्चा।
  9. सतत् व्यापक मूल्यांकन।
  10. शिक्षण सामग्री/उपकरण।
  11. समस्याएं।

PAPER 2: UPTET JUNIOR LEVEL SYLLABUS

Ucch Prathmik Star UPTET Syllabus

पेपर II (कक्षा VI से VIII के लिए) उच्च प्राथमिक स्तर।

कक्षा 6 से 8, 11 से 14 आयु समूह के लिए प्रासंगिक।

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1. बाल विकास और अध्यापन [30 प्रश्न]

(क) बाल विकास

  • विकास की अवस्था तथा अधिगम से उसका संबंध
  • बालक के विकास के सिद्धांत।
  • आनुवांशिकता और पर्यावरण का प्रभाव सामाजिकीकरण दबाव: सामाजिक विश्व और बालक (शिक्षक, अभिभावक और मित्रगण)
  • पाइगेट, कोलबर्ग और वायगोट्स्की : निर्माण और विवेचित संदर्श
  • बाल-केन्द्रित और प्रगामी शिक्षा की अवधारणाएं

(ख) बौद्धिकता के निर्माण का विवेचित संदर्श

  • बहु-आयामी बौद्धिकता
  • भाषा और चिंतन
  • समाज निर्माण के रूप में लिंग: लिंग भूमिकाएं. लिंग-पूर्वाग्रह और शैक्षणिक व्यवहार शिक्षार्थियों के मध्य वैयक्तिक विभेद, भाषा, जाति, लिंग, समुदाय, धर्म आदि की विविधता पर आधारित विभेदों को समझना।
  • अधिगम के लिए मूल्यांकन और अधिगम के मूल्यांकन के बीच अंतर, विद्यालय आधारित मूल्यांकन, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, संदर्श और व्यवहार।

(ग) अधिगम और अध्यापन

  • शिक्षार्थियों की तैयारी के स्तर के मूल्यांकन के लिए, कक्षा में शिक्षण और विवेचित चिंतन के लिए तथा शिक्षार्थी की उपलब्धि के लिए उपयुक्त प्रश्न तैयार करना।

2. भाषा I: हिन्दी [30 प्रश्न]

(क) हिन्दी भाषा बोधगम्यता (Unseen passage)

  • अनदेखे अनुच्छेदों को पढ़ना – दो अनुच्छेद एक गद्य अथवा नाटक और एक कविता जिसमें बोधगम्यता, निष्कर्ष, व्याकरण और मौखिक योग्यता से संबंधित प्रश्न होंगे (गद्य अनुच्छेद साहित्यिक, वैज्ञानिक, वर्णनात्मक अथवा तर्कमूलक हो सकता है)

(ख) हिन्दी भाषा विकास का अध्यापन (Pedagogy)

  • अधिगम अर्जन
  • भाषा अध्यापन के सिद्धांत
  • सुनने और बोलने की भूमिका, भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं। मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर विवेचित संदर्श
  • एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां: भाषा की कठिनाइयां, त्रुटियां और विकार
  • भाषा कौशल
  • भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करना : बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना
  • अध्यापन – अधिगम सामग्रियां: पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन
  • उपचारात्मक अध्यापन

(ग) हिन्दी की विषय-वस्तु (Subjective Question)

  • हिंदी वर्णमाला (स्वर, व्यंजन)
  • वर्णों के मेल से मात्रिक तथा अमात्रिक शब्दों की पहचान
  • वाक्य रचना
  • हिंदी की सभी ध्वनियों के पारस्परिक अंतर की जानकारी विशेष रूप से – ष, स, ब, व, ढ, ड, क्ष, छ, ण तथा न की ध्वनियाँ
  • हिंदी भाषा की सभी ध्वनियों, वर्णों अनुस्वार एव चन्द्रबिंदु में अंतर
  • संयुक्ताक्षर एवं अनुनासिक ध्वनियों के प्रयोग से बने शब्द
  • सभी प्रकार की मात्राएँ
  • विराम चिह्नों यथा – अल्प विराम, अर्द्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयबोधक, चिह्नों का प्रयोग
  • विलोम, समानार्थी, तुकान्त, अतुकान्त, सामान, ध्वनियों वाले शब्द
  • वचन, लिंग एव काल
  • प्रत्यय, उपसर्ग, तत्सम तद्भव व देशज, शब्दों की पहचान एव उनमें अंतर
  • लोकोक्तियाँ एव मुहावरों के अर्थ
  • सन्धि: 1. स्वर सन्धि – दीर्घ सन्धि, गुण सन्धि, वृद्धि सन्धि, यण सन्धि, अयादि सन्धि 2. व्यंजन सन्धि 3. विसर्ग सन्धि
  • वाच्य, समान एव अंलकार के भेद
  • कवियों एव लेखकों की रचनाएँ

3. भाषा II: (संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू में से कोई एक) [30 प्रश्न]

(क) बोधगम्यता (Unseen passage)

  • दो अनदेखे गद्य अनुच्छेद (तर्कमूलक अथवा साहित्यिक अथवा वर्णनात्मक अथवा वैज्ञानिक) जिनमें बोधगम्यता, निष्कर्ष, व्याकरण और मौखिक योग्यता से सम्बन्धित प्रश्न होंगे।

(ख) भाषा विकास का अध्यापन (Pedagogy)

  • अधिगम और अर्जन
  • भाषा अध्यापन के सिद्धांत
  • सुनने और बोलने की भूमिका, भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं
  • मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर विवेचित संदर्श
  • एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां भाषा की कठिनाईयां, त्रुटियां और विकार
  • भाषा कौशल
  • भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करना: बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना
  • अध्यापन- अधिगम सामग्री: पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन
  • उपचारात्मक अध्यापन

(ग) विषय-वस्तु (Subjective Question)

Junior Level के Exam में भी प्रत्येक भाषा (संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू) में बोधगम्यता और अध्यापन संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं। परंतु उनका विषय-वस्तु (Subjective Question) संबंधी Syllabus थोड़ा भिन्न होती हैं। जिनका विवरण निम्न हैं-

संस्कृत की विषय-वस्तु (UPTET Sanskrit Syllabus):

  1. संस्कृत संज्ञा
  2. शब्द रूप
  3. घरेलू वस्तुएं, संबंधी, आसपास की वस्तुएं, जानवरों, पक्षी, दैनिक जीवन की वस्तुएं आदि की जानकारी और उनके संस्कृत नाम।
  4. सर्वनाम
  5. क्रियाएं (धातु रूप)
  6. शरीर के अंगों के नामों का संस्कृत में प्रयोग
  7. अव्यय
  8. प्रत्यय – क्रत् , तध्दित् और स्त्री।
  9. संस्कृत संधियाँ
  10. संख्याएं– संस्कृत में संख्याओं की जानकारी
  11. लिंग की पहिचान, स्वर व्यंजन भेद, उच्चारण स्थान आदि।
  12. प्रमुख कवि और लेखक एवं उनकी रचनाओं की जानकारी।

अंग्रेज़ी की विषय-वस्तु:

  1. The sentence
    (A) Subject and predicate
    (B) Kind of sentences
  2. Parts of speech- Kinds of Noun, Pronoun, Adverb, Adjective, Verb, Preposition, Conjunction
  3. Tenses-Present, Past, Future
  4. Articles
  5. Punctuation
  6. Word formation
  7. Active & Passive voice
  8. Singular & Plural
  9. Gender

उर्दू की विषय-वस्तु:

  1. उर्दू के मौलानाओं की बैठक की जानकारी।
  2. उर्दू के प्रसिद्ध जनजातियों और कवियों के प्रसिद्ध जीवन और कविता का ज्ञान।
  3. मुख्तालिफसनाफ अदब जैसे मजनूम, अफसाना मर्सिया, मसनवी दास्तान आदि। मां, अम्सल की तारीफ आदि की जानकारी।
  4. इस्लाम की जानकारी, जमीर, सिफत, मुतजादलफाज, वाहिद, मोजक्कर, मोआनस आदि के बारे में जानकारी।
  5. संत (तस्बीह और इसतारा, तलमिह, मरातुनजिर), आदि आदि के बारे में जानकारी।
  6. मुहावरे, जुरबल अम्सल का ज्ञान।
  7. अलूदगी नबराबारी, तालिम बरामन, आदमे, तगाजिया का वातावरण जैसा मुख्तालिफ समाज मुसायल आदि की जानकारी।
  8. उर्दू की मान्यताओं, कहानियों, हिकायतों और संस्मरणों में मौजूद सामाजिक और खालिक अकबर आदि के बारे में जानकारी।
  9. संतों का ज्ञान

4. गणित एवं विज्ञान [60 प्रश्न]

(A) गणित [30 प्रश्न]

(क) गणितीय विषय-वस्तु (Subjective Question)

अंक प्रणाली:

  • अंकों को समझना
  • अंकों के साथ खेलना
  • पूर्ण अंक
  • नकारात्मक अंक और पूर्णाक
  • भिन्न

बीजगणित:

  • बीजगणित का परिचय
  • समानुपात और अनुपात

ज्यामिति:

  • मूलभूत ज्यामितिक विचार (2-डी)
  • बुनियादी आकारों को समझना
  • सममिति।
  • निर्माण (सीधे किनारे वाले मापक, कोणमापक, परकार का प्रयोग करते हुए)

क्षेत्रमिति:

  • आंकड़ा प्रबंधन

(ख) गणितीय अध्यापन संबंधी मुद्दे (Pedagogy)

  • गणितीय/तार्किक चिंतन की प्रकृति
  • पाठ्यचर्या में गणित का स्थान
  • गणित की भाषा
  • सामुदायिक गणित
  • मूल्यांकन
  • उपचारात्मक शिक्षण
  • शिक्षण की समस्याएं

(B) विज्ञान [30 प्रश्न]

(क) विज्ञान की विषय-वस्तु (Subjective Question)

  • भोजन
  • भोजन के स्रोत
  • भोजन के घटक
  • भोजन को साफ करना
  • पदार्थ
  • दैनिक उपयोग की सामग्री
  • जीवित प्राणियों की दुनिया
  • चीजें, लोगों और विचारों को स्थानांतरित करना
  • चीज़ें कैसे काम करती है
  • इलेक्ट्रिक सर्किट
  • चुंबक
  • प्राकृतिक घटनाएं
  • प्राकृतिक संसाधन

(ख) विज्ञान के अध्यापन संबंधी मुद्दे (Pedagogy)

  • विज्ञान की प्रकृति और संरचना
  • प्राकृतिक विज्ञान/लक्ष्य और उद्देश्य
  • विज्ञान को समझना और उसकी सराहना करना
  • दृष्टिकोण/एकीकृत दृष्टिकोण प्रेक्षण/प्रयोग/अन्वेषण (विज्ञान की पद्धति)
  • अभिनवता
  • पाठ्यचर्या सामग्री/सहायता-सामग्री
  • मूल्यांकन – संज्ञात्मक/मनोप्रेरक/प्रभावन
  • समस्याएं
  • उपचारात्मक शिक्षण

UPTET Syllabus

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