कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ – जीवन परिचय, कृतियां और भाषा शैली

प्रश्न

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय प्रस्तुत करते हुए उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।

अथवा

कन्हैयालाल मिश्र का साहित्यिक परिचय प्रस्तुत कीजिए और उनकी भाषा-शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Kanhiyalal Prabhakar Mishra ‘Prabhakar’

स्वतन्त्रता आन्दोलन और साहित्य के प्रति समर्पित अनेक साधकों में श्री कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का विशिष्ट स्थान है। पत्रकारिता के क्षेत्र में इन्हें विशेष ख्याति प्राप्त हुई। प्रभाकर जी के विचार उदार, राष्ट्रवादी और मानवतावादी हैं अतः देश-प्रेम और मानवता के अनेक रूप इनकी रचनाओं में देखने को मिलते हैं।

पत्रकारिता के क्षेत्र में इन्होंने निहित स्वार्थों को छोडकर समाज में उच्च आदशों को स्थापित किया है। इन्होंने हिन्दी को नवीन शैली-शिल्प से सशोभित किया है। इन्होंने संस्मरण, रेखाचित्र, यात्रा वृत्तान्त, रिपोतजि आदि लिखकर साहित्य संवर्द्धन किया है।

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का ‘जीवन-परिचय’

प्रभाकर जी का जन्म सन् 1906 ई. में पुरोहित पं. रामदत्त मिश्र के यहां सहारनपुर जिले के देवबन्द नामक ग्राम में हुआ। पारिवारिक निम्न आर्थिक स्थिति के कारण इनकी विद्यालय की शिक्षा भली प्रकार न चल पाई। इन्होंने अपने प्रयास से ही संस्कृत, अंग्रेजी आदि का अध्ययन किया।

जब ये खुर्जा संस्कृत विद्यालय के छात्र थे तभी राष्ट्र नेता मौलाना आसिफ अली के भाषण से प्रभावित होकर परीक्षा त्याग दी और स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पड़े। इसके बाद इन्होंने अपना पूरा जीवन देश सेवा को समर्पित कर दिया।

भारतीय स्वतन्त्रता का सपना लेकर इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में कदम रखा। पत्रकारिता के क्षेत्र में इन्होंने महान मानवीय आदेश की कल्पना की। इनके स्वतन्त्रता सेनानी जीवन के अनेक संस्मरण मार्मिक रूप में मिलते हैं। मई 1994 में
इनका देहावसान हो गया।

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की ‘कृतियां’

  1. ललित निबन्ध – (१) बाजे पायलिया के घंघरू, (२) क्षण बोले कण मुस्काए।
  2. संस्मरण – (१) दीप जले शंख बाजे।
  3. रेखाचित्र – (१) माटी हो गई सोना, (२) नई पीढ़ी के विचार, (३) भूले विसरे चेहरे, (४) जिन्दगी मुस्कराई।
  4. लघुकथा – (१) धरती के फूल, (२) आकाश के तारे।
  5. सम्पादन – (१) नया जीवन, (२) विकास।

भाषा का स्वरूप

मिश्र जी की भाषा अद्भुत प्रवाह और स्वाभाविकता लिए हुए है। इनके वाक्य-विन्यास में भी विविधता है। इस कारण इनकी भाषा में कहीं-कहीं अंग्रेजी तथा उर्दू के बोलचाल के शब्द प्रयुक्त हुए हैं। शब्दों की चमत्कारपूर्ण प्रस्तुति, भावानुकूल वाक्य-विन्यास और सुन्दर उक्तियां इनकी भाषा को अत्यन्त आकर्षक बनाती हैं।

इन्होंने शब्दों की लाक्षणिक शक्ति का प्रचुरता से प्रयोग किया है। साधारण शब्दों को भी इन्होंने नया अर्थ, नई भंगिमा देकर भाषा पर अपना अधिकार जताया है। मिश्र जी की भाषा में मुहावरों तथा उक्तियों का बड़ा सहज प्रयोग हुआ है। अलंकारों का प्रयोग भी भाषा को सुन्दर बनाता है। इनके छोटे-छोटे एवं सुसंगठित वाक्यों में सूक्ति की सी संक्षिप्तता और अर्थ-गाम्भीर्य है।

समग्रतः यह कहा जा सकता है कि कन्हैयालाल मिश्र की भाषा में व्यंग्यात्मकता, सरलता, मार्मिकता, चुटीलापन एवं भावाभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता विद्यमान है।

शैली के विविध रूप

प्रभाकर जी ने अपनी रचनाओं में विविध प्रकार की शैलियों का प्रयोग किया है। उनकी शैली विषय के अनुरूप परिवर्तित होती रहती है। प्रमुख रूप से निम्न प्रकार की शैलियां उनकी रचनाओं
में प्रयुक्त हैं :

बर्णनात्मक शैली

संस्मरणों में प्रमुखता से इस शैली का प्रयोग मिश्र जी ने किया है। रिपोर्ताजों में भी प्रायः इसी शैली के दर्शन होते हैं। सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, आवश्यकतानुसार छोटे और लम्बे वाक्य इस
शैली की विशेषता है। वर्णन इस प्रकार से किया गया है जिससे घटना या तथ्य का सजीव चित्र आंखों के सम्मुख उपस्थित हो जाता है।

भावात्मक शैली

इसे मिश्र जी की प्रमुख शैली माना जा सकता है। उनकी अधिकांश रचनाएं इसी शैली में लिखी गई है। इस शैली में सरल, सरस एवं प्रवाहपूर्ण भाषा का प्रयोग किया गया है तथा कहीं-कही।
आलंकारिकता का पुट भी विद्यमान है। वाक्य छोटे-छोटे हैं तथा भाव व्यक्त करने में पूर्ण सक्षम हैं। एक उदाहरण द्रष्टव्य है :

“हां वह मां ही थी, होम की अध्यक्षा मदर टेरेसा, मातृभूमि जिसकी फ्रांस और कर्मभूमि भारत। उभरती तरुणाई से उम्र के इस ढलाव तक रोगियों की सेवा में लवलीन। यही काम, यही धाम, यही राग, यही चाव और बस, यही।”

चित्रात्मक शैली

रेखाचित्रों में इस शैली का प्रयोग मिश्र जी ने सर्वाधिक किया है। शब्दों के माध्यम से वे व्यक्ति का ऐसा चित्र प्रस्तुत करते है कि उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व पाठक के समक्ष साकार हो जाता है।यहां इस शैली का एक उदाहरण प्रस्तुत है :

“देह उनकी कोई पैंतालीस वसंत देखी, वर्ण हिमश्वेत, पर अरुणोदय की रेखाओं से अनुरंजित, कद लम्बा और सुता-संधा।”

हिन्दी साहित्य में स्थान

कन्हैयालाल मिथ ‘प्रभाकर’ हिन्दी साहित्य के निवन्ध विधा के स्तम्भ हैं। इनकी अद्वितीय भाषा और शैली ने इनका स्थान गद्यकारों में विशिष्ट बना लिया है। हिन्दी साहित्य में अपने महान
कृतित्व के लिए प्रभाकर जी सदैव स्मरणीय रहेंगे। वस्तु एवं शिल्प दोनों ही दृष्टियों से उनका कृतित्व बेजोड है।

इनका गद्य सशक्त है, विचार मौलिक हैं एवं विषय निरूपण प्रभावशाली है। हिन्दी रिपोर्ताज विधा के पल्लवक, मानव मूल्यों के सजग प्रहरी एवं देशभक्त साहित्यकार के रूप में उनकी सेवाओं से हिन्दी जगत कभी उऋण नहीं हो सकता।

हिन्दी साहित्य के अन्य जीवन परिचय

हिन्दी अन्य जीवन परिचय देखने के लिए मुख्य प्रष्ठ ‘Jivan Parichay‘ पर जाएँ। जहां पर सभी जीवन परिचय एवं कवि परिचय तथा साहित्यिक परिचय आदि सभी दिये हुए हैं।

Related Posts

जगन्नाथ दास रत्नाकर – जीवन परिचय, कृतियां और भाषा शैली

Q. कविवर जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ का जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए। जगन्नाथ दास रलाकर आधुनिक काल के ब्रजभाषा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। इनकी प्रतिभा बहुआयामी थी,...Read more !

काका कालेलकर (Kaka Kalelkar) – जीवन परिचय, रचनाएँ और भाषा शैली

काका कालेलकर (Kaka Kalelkar) का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, कवि परिचय एवं भाषा शैली और उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं कृतियाँ। काका कालेलकर का जीवन परिचय एवं साहित्यिक परिचय नीचे दिया...Read more !

माखनलाल चतुर्वेदी – जीवन परिचय, रचनाएं, कविता, Makhanlal Chaturvedi

माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi: 1889 – 1968) का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय एवं भाषा शैली और उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं कृतियाँ। प्रसिद्ध “साहित्य अकादमी पुरस्कार” का आरंभ इन्हीं से हुआ...Read more !

मोहन राकेश – जीवन परिचय, कृतियां और भाषा शैली

प्रश्न मोहन राकेश की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए। अथवा मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय दीजिए एवं उनकी भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। Mohan Rakesh मोहन राकेश आधुनिक परिवेश...Read more !

केदारनाथ अग्रवाल – जीवन परिचय, कविता, रचनाएँ, Kedarnath Agarwal

केदारनाथ अग्रवाल (Kedarnath Agarwal) का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, कवि परिचय एवं भाषा शैली और उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं कृतियाँ। केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय एवं साहित्यिक परिचय नीचे दिया...Read more !