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Articles by Editorial Team:

हिन्दी भाषा – हिन्दी भाषा का विकास, व्युत्पत्ति और इतिहास

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हिंदी भाषा क्या है? हिंदी भाषा (Hindi Language) : हिन्दी विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केन्द्रीय स्तर पर भारत में दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेज़ी है।...

अलंकार – Alankar की परिभाषा, भेद, उपभेद और उदाहरण – Alankar in Hindi

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अलंकार (Figure of Speech): Alankar in Hindi परिभाषा (Alankar Ki Paribhasha): अलंकार का शाब्दिक अर्थ होता है- ‘आभूषण’, जिस प्रकार स्त्री की शोभा आभूषण से उसी प्रकार काव्य की शोभा...

अपभ्रंश – भाषा – तृतीय प्राकृत, विशेषता, वर्गीकरण, काल – इतिहास

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अपभ्रंश भाषा (तृतीय प्राकृत) अपभ्रंश भाषा का समय काल 500 ई. से 1000 ई. तक माना जाता हैं। ‘अप्रभ्रंश’ मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा और आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के बीच की कड़ी है।...

प्राकृत भाषा – द्वितीय प्राकृत, विशेषता, वर्गीकरण और इतिहास

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प्राकृत भाषा (द्वितीय प्राकृत) प्राकृत भाषा (1 ई. से 500 ई. तक) मध्यकालीन आर्यभाषा को ‘प्राकृत’ भी कहा गया है। प्राकृत भाषा की व्युत्पत्ति: ‘प्राकृत’ की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में दो मत प्रचलित...

पालि भाषा – प्रथम प्राकृत, विशेषता, वर्गीकरण – इतिहास

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पालि भाषा (प्रथम प्राकृत) पालि भाषा (500 ई.पू. से 1 ई. तक): ‘पालि’ का अर्थ ‘बुद्ध वचन‘ (पा रक्खतीति बुद्धवचनं इति पालि) होने से यह शब्द केवल मूल त्रिपिटक ग्रन्थों...

आधुनिक भारतीय आर्यभाषा – परिचय, विशेषता एवं वर्गीकरण, इतिहास

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आधुनिक भारतीय आर्यभाषा का परिचय आधुनिक भारतीय आर्यभाषा(1000 ई. से अब तक): आधुनिक भारतीय आर्यभाषा का समयकाल 1000 ई. से अब तक है। आधुनिक भारतीय आर्यभाषा का विकास अपभ्रंश से...

मध्यकालीन आर्य भाषा – विशेषता, वर्गीकरण – इतिहास

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मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा को हिंदी भाषा (Bhasha) में अध्ययन की दृष्टि से तीन भागों में विभाजित/वर्गीकरण किया गया है- पालि (500 ई.पू. से 1 ई....

प्राचीन भारतीय आर्य भाषा – वैदिक एवं लौकिक संस्कृत का इतिहास

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प्राचीन भारतीय आर्य भाषा : प्राचीन भारतीय आर्य भाषा (Bhasha) को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किया गया है- वैदिक संस्कृत (2000 ई.पू. से 800 ई.पू. तक)...

लौकिक संस्कृत – लौकिक संस्कृत का अर्थ एवं लौकिक संस्कृत इतिहास

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लौकिक संस्कृत (Laukik Sanskrit : 800 ई.पू. से 500 ई.पू. तक) ‘प्राचीन-भारतीय-आर्य-भाषा‘ का वह रूप है जिसका पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ में विवेचन किया गया है, वह ‘लौकिक संस्कृत’ कहलाता है।...