निपात-अवधारक – परिभाषा, भेद और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण

निपात-अवधारक | Nipat और अवधारक अव्यय क्या हैं?

Nipat-Avdharak Ki Paribhasha
Nipat-Avdharak Ki Paribhasha

किसी भी बात पर अतिरिक्त भार देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है उसे निपात (अवधारक) कहते है। जैसे :- भी, तो, तक, केवल, ही, मात्र, मत, क्या, हाँ, जी, न आदि।

निपात के उदाहरण (Nipat Ke Udaharan) : प्रयोग

  • तुम्हें आज रात रुकना ही पड़ेगा।
  • तुमने तो हद कर दी।
  • कल मै भी आपके साथ चलूँगा।
  • गांधीजी को बच्चे तक जानते है।
  • धन कमा लेने मात्र से जीवन सफल नहीं हो जाता।

निपात के प्रकार (Nipat Ke Bhed)

हिन्दी में निपात (अवधारक) के नौ प्रकार माने गए हैं-

  1. स्वीकृतिबोधक निपात- हा, जी, जी हाँ
  2. नकारबोधक निपात- जी नहीं, नहीं
  3. निषेधबोधक निपात- मत
  4. प्रश्नबोधक निपात- क्या
  5. विस्मयबोधक निपात- क्या, काश
  6. तुलनाबोधक निपात- सा
  7. अवधारणाबोधक निपात- ठीक, करीब, लगभग, तकरीबन
  8. आदरबोधक निपात- जी
  9. बल प्रदायकबोधक निपात-  तो, ही, भी, तक, भर, सिर्फ, केवल

यास्क के अनुसार निपात (अवधारक) के भेद

यास्क ने निपात के तीन भेद माने है-

  1. उपमार्थक निपात– इव, न, चित्, नुः
  2. कर्मोपसंग्रहार्थक निपात– न, आ, वा, ह;
  3. पदपूरणार्थक निपात– नूनम्, खलु, हि, अथ

यद्यपि निपातों में सार्थकता नहीं होती, तथापि उन्हें सर्वथा निरर्थक भी नहीं कहा जा सकता। निपात शुद्ध अव्यय नहीं है; क्योंकि संज्ञाओं, विशेषणों, सर्वनामों आदि में जब अव्ययों का प्रयोग होता है, तब उनका अपना अर्थ होता है, पर निपातों में ऐसा नहीं होता। निपातों का प्रयोग निश्र्चित शब्द, शब्द-समुदाय या पूरे वाक्य को अन्य भावार्थ प्रदान करने के लिए होता है।

निपात के कार्य

व्याकरण के अनुसार निपात के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
  • अर्थ में विशेष बल देना: यह निपात का सबसे मुख्य कार्य है। यह वाक्य के किसी विशेष शब्द पर जोर देता है। जैसे: “राम ही दिल्ली जाएगा।” (यहाँ ‘ही’ स्पष्ट करता है कि केवल राम जाएगा, कोई और नहीं।)
  • निश्चितता (अवधारण) प्रदान करना: किसी बात को पूरी तरह स्पष्ट या सुनिश्चित करने के लिए इनका प्रयोग होता है। जैसे: “मैंने उसे तक नहीं देखा।” (यह पूरी तरह निश्चित करता है कि देखने की क्रिया बिल्कुल नहीं हुई।)
  • तुलना करना: कुछ निपात तुलना का भाव पैदा करते हैं। जैसे: “उसका मुख चंद्रमा-सा सुंदर है।” (यहाँ ‘सा’ तुलना के लिए प्रयुक्त है।)
  • प्रश्न पूछने का भाव: कुछ निपात वाक्य को प्रश्नात्मक स्वरूप देने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। जैसे: “क्या आप घर जा रहे हैं?” (यहाँ ‘क्या‘ निपात है जो प्रश्न का बोध करा रहा है।)
  • अस्वीकृति या निषेध जताना: बात को नकारने के लिए भी इनका प्रयोग होता है। जैसे: “आज बाहर मत जाओ।” (यहाँ ‘मत’ मनाही का भाव दे रहा है।)
  • विस्मय या आश्चर्य प्रकट करना: ये मन के भावों जैसे हैरानी को व्यक्त करते हैं। जैसे: “क्या सुंदर दृश्य है!”
  • वाक्य के भाव को व्यापक बनाना: ‘भी’ जैसे निपात वाक्य के दायरे को बढ़ा देते हैं। जैसे: “मैं भी आपके साथ चलूँगा।” (इसका अर्थ है कि अन्य लोगों के साथ-साथ मैं भी शामिल हूँ।)

प्रमुख निपात शब्द: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सा, जी, क्या, मत, काश।

FAQs

Q1.

निपात-अवधारक क्या होते हैं?

निपात-अवधारक वे शब्द होते हैं जो किसी वाक्य में विशेष अर्थ या भाव प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं, लेकिन उनका कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता। ये वाक्य में अन्य शब्दों के साथ मिलकर उनके अर्थ को स्पष्ट या प्रबल करते हैं।
Q2.

निपात-अवधारक के कुछ उदाहरण क्या हैं?

हिंदी में प्रचलित निपात-अवधारकों के उदाहरण हैं – ही, तो, भी, ही, तक, मात्र, केवल, बस, ही सही, तकरीबन आदि। उदाहरण: मुझे ही जाना होगा।, वह स्कूल भी गया था।
Q3.

निपात-अवधारक का वाक्य में क्या महत्व है?

निपात-अवधारक वाक्य में जोर देने, सीमित अर्थ प्रकट करने, तुलना करने या विशेष अर्थ व्यक्त करने में सहायक होते हैं। ये वाक्य की स्पष्टता और प्रभाव बढ़ाने में मदद करते हैं।

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